Saturday 12 November 2011

प्रसन्नता होगी यदि इस लिंक का विस्तार आपके वेब पन्ने पर भी करेंगे

श्रीमद्भगवत गीता विश्व का अप्रतिम ग्रंथ है !
धार्मिक भावना के साथ साथ दिशा दर्शन हेतु सदैव पठनीय है !
जीवन दर्शन का मैनेजमेंट सिखाती है ! पर संस्कृत में है !
हममें से कितने ही हैं जो गीता पढ़ना समझना तो चाहते हैं पर संस्कृत नहीं जानते !
मेरे ८४ वर्षीय पूज्य पिता प्रो सी बी श्रीवास्तव विदग्ध जी संस्कृत व हिन्दी के विद्वान तो हैं ही , बहुत ही अच्छे कवि भी हैं , उन्होने महाकवि कालिदास कृत मेघदूत तथा रघुवंश के श्लोकशः हिन्दी पद्यानुवाद किये , वे अनुवाद बहुत सराहे गये हैं . हाल ही उन्होने श्रीमद्भगवत गीता का भी श्लोकशः पद्यानुवाद पूर्ण किया . जिसे वे भगवान की कृपा ही मानते हैं .
उनका यह महान कार्य http://vikasprakashan.blogspot.com/ पर सुलभ है . रसास्वादन करें . व अपने अभिमत से सूचित करें . कृति को पुस्तकाकार प्रकाशित करवाना चाहता हूं जिससे इस पद्यानुवाद का हिन्दी जानने वाले किन्तु संस्कृत न समझने वाले पाठक अधिकतम सदुपयोग कर सकें . नई पीढ़ी तक गीता उसी काव्यगत व भावगत आनन्द के साथ पहुंच सके .
प्रसन्नता होगी यदि इस लिंक का विस्तार आपके वेब पन्ने पर भी करेंगे . यदि कोई प्रकाशक जो कृति को छापना चाहें , इसे देखें तो संपर्क करें ..०९४२५८०६२५२, विवेक रंजन श्रीवास्तव

Sunday 21 August 2011

janlokpal bill as drafted by team anna

Institution of
Jan Lokpal at central govt level
Jan Lokayukta in each state

Correspondingly Jan Lokpal to accept corruption complaints against Central govt dept and Jan Lokayukta against state govt dept

Each will have 10 members and 1 chairperson

Will be completely Independent

Politicians and bureaucrats will not able to interfere in their functioning

Will get whatever financial resources they require and will be empowered to select and employ any number of employees from within the government or outside.

Present System - Despite Evidence, No Punishment

Proposed System - Jan Lokpal and Jan Lokayukta will ensure punishment for corruption… by:

Time bound investigations
Investigation to be completed within 1 year
May employ more staff to complete within time

After investigation if proven guilty following 2 actions shall be taken:

Power to dismiss corrupt officers
If complaint is proved, can remove a govt officer or impose departmental penalties
Time bound trial
Will file a case in trial court
Trial in the court to complete & announce punishment
within next 1 year
May direct the govt to set up additional courts to
complete the trial in time

Recovery of loss caused to govt
During investigations, they shall ban transfer of assets of the accused
At the time of conviction, the court will assess the loss caused to the govt
Entire loss to be recovered from the assets of the accused

Currently no such provision
in our existing laws

Provision for:
Confiscation of Assets
Each bureaucrat, politician and judge to submit their statement of moveable and immoveable assets every year
This will be declared publicly, on the official website

Provision for:
Confiscation of Assets
If an asset is found to be owned by a public servant later and undeclared, it will be deemed to be obtained through corruption
After each election, assets declared by each candidate to be verified
If undeclared assets are found, a case will be registered
And most importantly Jan Lokpal and Jan Lokayukta have:
Power to punish if its orders are not followed
Can impose financial penalties on the guilty officials.
Initiate contempt proceedings against the guilty officials


Common man is compelled to pay bribe
Jan Lokpal and Jan Lokayukta will provide relief to the common as:
Each govt dept will have to make Citizen’s Charter
Charter specifies who does what job and in how much time
Eg. charter will tell X officer will make ration card in Y days

If Charter is not followed, then people can complain to the Head of that department who will be designated as the Public Grievance Officer (PGO)

PGO will redress the complaint within 30 days maximum
If PGO doesn’t satisfy the complainant, then a complaint can be made to the Vigilance officer of Jan Lokpal and Jan Lokayukta.

When a complaint is made to Jan Lokpal or Jan Lokayukta, it will be deemed to have corruption angle.
If PGO doesn’t satisfy the complainant, then a complaint can be made to the Vigilance officer of Jan Lokpal and Jan Lokayukta.

When a complaint is made to Jan Lokpal or Jan Lokayukta, it will be deemed to have corruption angle.


How to ensure that there is
no corruption within
Jan Lokpal or Jan Lokayukta

Selection process for the members and Chairperson of Jan Lokpal and Jan Lokayukta has been kept transparent and participatory

Selected by a Selection Committee comprising:
Prime Minister
Leader of the opposition in Lok Sabha
2 youngest judges of Supreme Court (SC)
2 youngest Chief Justices of High Courts
Comptroller and Auditor General (CAG)
Chief Election Commissioner (CEC)
When the Selection Committee chooses, those CECs and CAGs are ineligible to become part of Search Committee:
who have any substantive allegation of corruption against them
who have joined any political party after retirement
who are still in any government appointment
Selection committee will choose from this list, by consensus

All the meetings of the Search Committee and Selection Committee shall be video recorded and will be made public.

Jan Lokpal and Jan Lokayukta will select & appoint its own officers and staff


The Chairperson and members of Lokpal and Lokayukta will not be eligible for appointment to any position in the govt or for contesting elections after they leave office.
Complaints against Staff like the Public Grievance Officers, Vigilance Officers, Chief Vigilance Officers will be made to Jan Lokpal or Jan Lokayukta
Enquiry of complaint within 1 month
If the allegation proved, Jan Lokpal or Jan Lokayukt will dismiss him from job in the next 1 month
Criminal case will be registered under various sections of Indian Penal Code and Prevention of Corruption Act
Complaints against members and chair person of Lokpal and Lokayukta:
Will be made to Supreme Court or respective High Court through a petition
A five judge bench of respective Court, will hear the petition
After hearing may order the formation of a Special Investigation Team (SIT)
SIT will have to conduct inquiry and submit its report within 3 months
On the basis of this enquiry report, the respective Court may order removal of the member or Chairperson.

Wednesday 17 August 2011

k b c

कभी किसी की बड़ी जरूरत पूरी करता के बी सी
कभी किसी के मन की हसरत पूरी करता केबीसी
हर दर्शक का ज्ञान बढ़ाता जब जब आता केबीसी
कभी किसी को शोहरत देता , मान बढ़ाता केबीसी

Sunday 14 August 2011

आजादी के ६४ वर्षो के बाद

आजादी के ६४ वर्षो के बाद मेरी नजरो में देश की छबि ....
जहां एक सुई तक मेड इन इंगलैंड होती थी , वहां आज सैटेलाइट और चंद्रयान तक हम बना रहे हैं ,देश में क्या नहीं बन रहा हैं ? यह सब हम कर रहे हैं अपने संसाधनो से , अपनी तकनीक से , अर्थात हमने विज्ञान , शिक्षा , तकनीक प्रत्येक क्षेत्र में प्रगति की है . कृषि उत्पादन इतना बढ़ा है कि जहां आजादी से पहले अकाल पड़ता था , उसी देश में बढ़ी हुई आबादी के बाद भी हमारे पास ढ़ेर ढ़ेर सा अनाज गोदामो में भरा हुआ है . जहां डाकिया घोड़े पर बैठकर गांव गांव चिट्ठियां बांटता था , वहां अब पलक झपकते मोबाइल पर , टीवी पर व अन्य संचार माध्यमो से हम सब सदैव पास पास हैं . जहां आजादी से पहले प्लेग जैसी महामारियां फैलती रहती थीं , वहां आज दुनिया के दूसरे देशो से लोग हमारे यहां चिकित्सा हेतु आते हैं .खेलो में भी हम अब विश्वस्तरीय दौड़ में शामिल हो चुके हैं .
हमारे साथ ही पाकिस्तान भी आजाद हुआ था पर ६४ बरसो के सफर में आज हम उनसे कोसो आगे हैं .यह हमारी कार्य प्रणाली प्रदर्शित करता है .

कड़े संघर्षो व बलिदानो से मिली आजादी के प्रति लोगो में जागरुखता ....
इस सारी भौतिक प्रगति के साथ ही जो बदनुमा दाग हमारे दामन पर आजादी के बाद लगा है , वह है देशवासियो के चारित्रिक पतन का दाग . भ्रष्टाचार हमारी रगो में जाने कब कैसे बहुत भीतर तक समा गया है . लोगो का पारस्परिक आत्मीयता का संबंध कम होता जा रहा है , उसकी जगह बनावटीपन पाश्चात्य दिखावे की संस्कृति हम अपनाते जा रहे हैं . कड़े संघर्षो व बलिदानो से मिली आजादी के प्रति नई पीढ़ी में जागरुखता तो है , पर पाश्चात्य अंधानुकरण की दौड़ में और स्वयं उस संघर्ष का हिस्सा न होने के कारण आज की पीढ़ी में उस पीड़ा और दर्द का अभाव है ,नेताओ ने अनुकरणीय आदर्श प्रस्तुत करने की अपेक्षा स्वार्थ और पैसो की राजनीति की है . लेकिन जब जब हम पर विदेशी संकट आया हमारे देशवासियो और सैनिको ने चीन , पाकिस्तान या आतंक के हर चेहरे को मुंहतोड़ जबाब दिया है .

स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर देश के युवाओ को संदेश और उनसे अपेक्षायें......
हमारी युवा शक्ति ही हमारी सबसे बड़ी ताकत है .बुद्धि और विद्वता के स्तर पर हमारे युवाओ ने सारे विश्व में मुकाम स्थापित किया है . हमारे युवाओ के बगैर किसी अमेरिकन कंपनी का काम नही चलता . हमारी स्त्री शक्ति सशक्त हुई है . स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर देश के युवाओ को मेरा यही संदेश है कि हम किसी से कम नही है और हमारे देश को विश्व में नम्बर वन बनाने की जबाबदारी हमारी पीढ़ी की ही है .हमें नीति शिक्षा की किताबो से चारित्रिक उत्थान के पाठ पढ़ने ही नही उसे अपने जीवन में उतारने की जरूरत है . मेरा विश्वास है कि भारतीय लोकतंत्र एक परिपक्व शासन प्रणाली प्रमाणित होगी , इस समय जो कमियां भ्रष्टाचार , जातिगत आरक्षण , क्षेत्रीयता , भाषावाद , वोटो की खरीद फरोक्त को लेकर देश में दिख रही हैं उन्हें दूर करके हम विश्व नेतृत्व और वसुधैव कुटुम्बकम् के प्राचीन भारतीय मंत्र को साकार कर दिखायेंगे .


vivek ranjan shrivastava
public relation officer and Adl Superintending engineer

Friday 20 May 2011

अब तो ए सी की सुविधा हैं जज साहब .... क्या स्वतंत्र भारत के माननीय न्यायलयो को अपनी महीने महीने भर की छुट्टियो ....

लाखो मुकदमें पेंडिग हैं और माननीय न्यायालय बच्चो के स्कूल की छुट्टियो की तरह एक महीने की गर्मियो की छुट्टियां मना रहे हैं ...
अंग्रेजो के समय की बात और थी अब तो ए सी की सुविधा हैं जज साहब ....
क्या स्वतंत्र भारत के माननीय न्यायलयो को अपनी महीने महीने भर की छुट्टियो पर पुनर्विचार नही करना चाहिये ...
क्या सुप्रिम कोर्ट मेरी इस खुली जनहित याचिका पर कोई डाइरेक्टिव जारी करेगा !

Tuesday 17 May 2011

बने भवनो को न तोड़ें बुद्धि से सोचें जरा निर्माण सारा व्यैक्तिक से ज्यादा राष्ट्रीय है संपदा

बुद्धि से सोचें जरा


प्रो.सी. बी. श्रीवास्तव "विदग्ध"
संपर्क ओबी ११ , विद्युत मंडल कालोनी , रामपुर , जबलपुर म.प्र. ४८२००८
मोबा. ०९४२५८०६२५२, फोन ०७६१२६६२०५२


बने भवनो को न तोड़ें बुद्धि से सोचें जरा
निर्माण सारा व्यैक्तिक से ज्यादा राष्ट्रीय है संपदा

पेड़ हो कोई कहीं भी सबको देता आसरा
क्या उचित उसको मिटाना जो सघन सुखप्रद हरा ?

समझें कितनी मुश्किलों से खड़ी होती झोपड़ी
वर्षो की मेहनत से हो पाता कोई सपना हरा

काटकर के पेट कोई कुछ जुटा पाता है धन
ऐसे हर पैसे में होता मन का प्यारा रंग भरा

तोड़ घर परिसर निरर्थक वैद्यता कि नाम पर
व्यक्ति औ" सरकार दोनो का ही है अनहित बड़ा

नष्ट कर संपत्ति को शासन तो कुछ पाता नहीं
पर दुखी परिवार हो जाता सदा को अधमरा

ढ़हाना निर्मित भवन का कत्ल जैसा पाप है
उचित कह सकता इसे है सिर्फ कोई सिरफिरा

तोड़ना धन श्रम समय का राष्ट्रीय नुकसान है
जिससे व्यक्ति समाज रहता सदा डरा डरा

जोश में आदेश तो हो जाते शासन के मगर
जख्म पीड़ित जनो का जीवन भर न जाता भरा

नया हर निर्माण नियमित राष्ट्र का उत्कर्ष है
ध्वस्त करके सृजन का अपमान करना है बुरा

दण्ड दें उन व्यक्तियो को जो हैं मर्यादित नही
तोड़ना निर्मित घरो को है नही निर्णय सही

तोड़कर निर्माण दी जाती सजा निर्दोष को
जीने का अधिकार उनका जाता क्यो नाहक हरा

बिल्डरो की गलतियो का अर्थदण्ड उनको ही दें
लिप्त यदि अधिकारी हों तो उनसे जाया धन भरा

नागरिक को खाने रहने जीने का मौलिक अधिकार है
उन्हें दुख देना नहीं है न्याय स्वस्थ परंपरा

बने भवनो को न तोड़ें शांति से सोचें जरा
अनैतिकता तो बुरी है पर नही कोई घर बुरा

बुरा है अपराध पर अपराधी को तक देते क्षमा
उचित है अपराध पकड़ो मत करो घर से घृणा

Friday 13 May 2011

शर्मनाक है यह तोड़ फोड़

शर्मनाक है यह तोड़ फोड़

कल्पना श्रीवास्तव
ओ बी ११ , विद्युत मण्डल कालोनी , रामपुर , जबलपुर
९४२५८०६२५२


भोपाल में मीनाल माल ढ़हा कर सरकार बेहद खुश है , सरकारी कर्मचारी जो कुछ समय पहले तक ऐसे निर्माण करने की अनुमति देने के लिये बिल्डरों से गठजोड़ करके काला धन बटोर रहे थे , अब ऐसी सम्पत्तियो को चिन्हित न करने के एवज में मोटी रकम बटोर रहे हैं .
लोगों की गाढ़ी कमाई , उनकी आजीविका , अनुमति देने वाली एजेंसियो , प्रापर्टी सही है या नही इसकी सचाई की जानकारी के बिना , मोटी फीस वसूल कर वास्तविक कीमत से कम कीमत की रजिस्ट्री करने वाले रजिस्ट्रार कार्यालय के अमले ,बिना किसी जिम्मेदारी के सर्च रिपोर्ट बनवाकर फाइनेंस करने वाले बैंको की कार्य प्रणाली , और व्यक्तिगत रंजिश के चलते , राजनैतिक प्रभाव का उपयोग कर आहें बटोरने वाले मंत्रियो पर काफी कुछ लिखा जा रहा है .सरकार की इस अचानक कार्यवाही के पक्ष विपक्ष में बहुत कुछ लिखा जा रहा है . जिनका व्यक्तिगत कुछ बिगड़ा नही है , वे प्रसन्न है .निरीह आम जनता को उजाड़ने में सरकारी अमले को पैशाचिक सुख की प्राप्ति हो रही है .
मै एक स्वतंत्र लोकतांत्रिक भारत के "रामभरोसे " जी रहे आम नागरिक होने के नाते इस समूचे घटनाक्रम को एक दूसरे दृष्टिकोण से देखना चाहता हूं . एक आम आदमी जिसे मकान लेना है उसके पास खरीदी जा रही प्रापर्टी की कानूनी वैद्यता जानने के लिये बिल्डर द्वारा दिखाये जा रहे सरकारी विभागों से पास नक्शे एवं बाजू में किसी अन्य के द्वारा खरीदे गये वैसे ही मकान की रजिस्ट्री ,बैंक की सर्च रिपोर्ट तथा बिल्डर के निर्माण की गुणवत्ता के सिवाये और क्या होता है ? इस सबके बाद जब वह मकान खरीद कर दसो वर्षों से निश्चिंत वहां रह रहा होता है , नगर निगम उससे प्रसन्नता पूर्वक सालाना टेक्स वसूल रही होती है , टैक्स जमा करने में किंचित विलंब पर पैनाल्टी भी लगा रही होती है , उसे बिजली , पानी के कनेक्शन आदि जैसी प्राथमिक नागरिक सुविधायें मिल रही होती हैं तब अचानक एक सुबह कोई पटवारी उसके घर को अवैद्य निर्माण चिंहित कर दे , इतना ही नही सरकार अपनी वाहवाही और रुतबा बनाने के लिये उसे वह दुकान या मकान खाळी करने के लिये एक घंटे की मोहलत तक न दे तो इसे क्या कहा जाना चाहिये ? क्या इतने पर भी यह मानना चाहिये कि हम लोकतांत्रिक देश में रह रहे हैं ?
अवैद्य निर्माण को प्रोत्साहित भी सरकारो ने ही किया , कभी राजनैतिक संरक्षण देकर तो कभी पट्टे बांटकर , किसी के साथ कुछ तो कभी किसी और के साथ कुछ अन्य नीति आखिर क्या बताती है ? जबलपुर में अतिक्रमण विरोधी कार्यवाही में बालसागर में हजारो गरीबों के झोपड़े उजाड़ दिये गये , इस कार्यवाही में दो लोगो की मौत भी हो गई . क्या यह सही नही है कि ये अतिक्रमण करवाते समय नेताजी ने , तहसीलदार जी ने और लोकल गुंडो ने इन गरीबों का भरपूर दोहन किया था .
जो लोग इस आनन फानन में की गई तोड़फोड़ की प्रशंसा कर रहे हैं मैं उन्हें बताना चाहता हूं कि मेरे घर में एक चिड़िया ने एक फोटो फ्रेम के पीछे घोंसला बना लिया था , मैं छोटा था , घोंसले के तिनके चिड़िया की आवाजाही से गिरते थे , उस कचरे से बचने के लिये जब मैने वह घोसला हटाना चाहा तो उस घोंसले तक को हटाने के लिये, चिड़िया के बच्चो को बड़ा होकर उड़ जाने तक का समय देने की हिदायत मेरे पिताजी ने मुझे दी थी . संवेदनशीलता के इस स्तर पर जी रहे मुझ जैसो को सरकार की इस कार्यवाही की आलोचना का नैतिक आधिकार है ना ? चिड़िया के घोसले से फैल रहे कचरे से तो हमारा घर सीधे तौर पर प्रभावित हो रहा था , पर मेरा प्रश्न है कि मीनाल माल या इस जैसी अन्य तोड़ फोड़ से खाली जमीन का सरकार ने उससे बेहतर क्या उपयोग करके दिखाया है ? पर्यावरण की रक्षा में बड़े बड़े कानून बनाने वाले क्या मुझे यह बतायेंगे कि तोड़े गये निर्माण में लगा श्रम , सीमेंट , लोहा , अन्य निर्माण सामग्री नेशनल वेस्ट नही है ? उस सीमेंट , कांच व अन्य सामग्री के निर्माण से हुये प्रदूषण के एवज में समाज को क्या मिला ? इस क्रिमिनल वेस्ट का जबाबदार आखिर कौन है ? इगोइस्ट मंत्री जी ? नाम कमाने की इच्छा से प्रेरित आई ए एस अधिकारी ? क्या ऐसी कार्यवाहियो की अनुमति देने के लिये एक डिप्टी कलेक्टर स्तर के अधिकारी के हस्ताक्षर पर्याप्त हैं ? यह सब चिंतन और मनन के मुद्दे हैं .
मैं नही कहता कि अवैद्य निर्माण को प्रोत्साहन दिया जावे . सरकार ने यदि उन लोगो पर कड़ी कार्यवाही की होती , जिन्होने ऐसे निर्माणो की अनुमति दी थी तो भी भविष्य में ऐसे निर्माण रुक सकते थे . रजिस्ट्रार कार्यालय बहुत बड़े बड़े विज्ञापन छापता है जिनमें सम्पत्ति के मालिकाना हक के लिये वैद्य रजिस्ट्री होना जरूरी बताया जाता है , रजिस्ट्री से प्राप्त फीस सरकारी राजस्व का बहुत बड़ा अंश होता है , तो क्या इस विभाग को इतना सक्षम बनाना जरूरी नही है कि गलत संपत्तियो की रजिस्ट्री न हो सके , और यदि एक बार रजिस्ट्री हो जावे तो उसे कानूनी वैद्यता हासिल हो . आखिर हम सरकार क्यो चुनते हैं ,सरकार से सुरक्षा पाने के लिये या हमारे ही घरो को तोड़ने के लिये ?
मैं न तो कोई कानूनविद् हूं और न ही किसी राजनैतिक पार्टी का प्रतिनिधि . मैं नैसर्गिक न्याय के लिये इनोसेंट नागरिको की ओर से पूरी जबाबदारी से लिखना चाहता हूं कि यदि मीनाल माल एवं उस जैसी अन्य तोड़फोड़ की जगह उससे बेहतर कोई प्रोजेक्ट सरकार जनता के सामने नही ला पाती है तो यह तोड़फोड़ शर्मनाक है .क्रिमिनल वेस्ट है . मीनाल रेजीडेंसी देश की सर्वोत्तम कालोनियो में से एक है यदि इस तरह की कार्यवाही वहां हो सकती है तो भला कौन इंटरप्रेनर प्रदेश में निवेश करने आयेगा ? यह कार्यवाही निवेशको को प्रदेश में बुलाने के लुभावने सरकारी वादो के नितांत विपरीत है . आम आदमी से धोखा है , इसका जो खामियाजा सरकार अगले चुनावो में भुगतेगी वह तो बाद की बात है , पर आज कानून क्या कर रहा है ? क्या हम इतने नपुंसक समाज के निवासी है कि एक मंत्री अपने व्यक्तिगत वैमनस्य के लिये आम लोगो को घंटे भर में उजाड़ सकता है , और सब मूक दर्शक बने रहेंगे ?क्या इन असहाय लोगो के साथ अन्याय होता रहने दिया जावे क्योकि वे संख्या में कम हैं , मजबूर हैं और व्यवस्था न होने के चलते अज्ञानता से वे इन मकानो के मालिक हैं . ऐसे इंनोसेंट लोगो पर कार्यवाही करके सरकार कौन सी मर्दानगी दिखा रही है , और प्रमाणित होता है कि यह सब दुर्भावना पूर्ण है , जब बिल्डर से सौदा नही बना तो तोड़फोड़ शुरू , अधिकारो के ऐसे दुष्प्रयोग जनतांत्रिक देश में असहनीय हैं .
दुष्यंत कुमार की पंक्तियां हैं
लोग जिंदगी लगा देते हैं एक घर बसाने में
उन्हें पल भर भी नही लगता बस्तियां जलाने में
यद्यपि इन पंक्तियो का संदर्भ भिन्न है , पर फिर भी यह ऐसी सरकारी नादिरशाही की दृष्टि से प्रासंगिक ही हैं



लेखिका को सामाजिक विषयों पर लेखन हेतु अनेक पुरुस्कार मिल चुके हैं

Saturday 30 April 2011

६० प्रतिशत वार्षिक ब्याज दर ......

अच्छे से अच्छे मोडम की बाजार में कीमत होती है १००० से १५०० रु मात्र ...
हमसे बी एस एन एल इसका मासिक किराया वसूलता है ५० रु ...
मतलब ६० प्रतिशत वार्षिक ब्याज दर ....
क्या है भैया यह ....
कहने को T R A I है...उपभोक्ता हितो के लिये ....
ज्यादातर बुद्धिजीवी , पढ़े लिखे लोग ही ही ब्राड बैंड उपयोग कर रहे हैं , देश में ....
कोई इस मुद्दे को सही मंच पर उठायेगा ??
बिजली के मीटर १००० रु में आते हैं जिनका मासिक किराया १८ रु मासिक ही वसूला जाता है ...

Friday 29 April 2011

किसानों की आत्महत्या के कारण व समाधान: सुझाव

किसानों की आत्महत्या के कारण व समाधान: सुझाव


हमारी अर्थव्यवस्था कृषि पर व्यापक रूप से आधारित है। अतः हमें किसानों हेतु ऐसा वातावरण बनाना आवष्यक है जिससे उनका आर्थिक उन्नयन हो एवं उनमें अपने भविष्य के प्रति आष्वस्ति हो।

1. किसानो के कल्याण की विभिन्न सरकारी योजनाओं अलग-अलग विभागो से चलाई जा रही है जिसके लिए किसानों को कृषि विभाग, राजस्व विभाग, बैंको, पषुपालन विभाग, पंचायतो आदि-आदि के चक्कर लगाने पडते है एवं उनका शोषण भी होता है। अतः मेरा सुझाव है ऐसी व्यवस्था की जावे जिससे समन्वित रूप से केवल एक ही बिंदु पर संपर्क करने से किसान को सारी कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी मिल सके एवं वहीं से उसका लाभ भी उसे मिल सके। इस तरह की व्यवस्था से योग्य उम्मीदवार को सरकारी योजनाओं का समुचित लाभ मिल सकेगा एवं किसी तरह का दोहराव भी नहीं होगा।

2. दोहरी फसल के पांच एकड से बडे किसानों को जो स्वंय खेती का कार्य न कर मजदूरो के माध्यम से खेती करवाते है सब्सिडी वाली सरकारी योजनाओ का लाभ न दिया जावे, होता यह है कि ऐसे बडे किसान ही इन कल्याणकारी योजनाओं का लाभ ले लेते है । वे ही सरकारी कर्मचारियों को भ्रष्ट तरीको से लाभ देने हेतु प्रेरित करते है एवं वास्तविक लाभ के गरीब किसान वंचित रह जाते है।

3. बडी बीमारियों कैंसर, हृदय रोग आदि तथा ऐसी बीमारियाॅ जिनमे निरंतर औषधी सेवन करना पडता है जैसे मधुमेह, रक्तचाप आदि हेतु सारे छोटे किसानो का चिकित्सा बीमा करवाया जावे इससे किसानो में जीवन के प्रति आष्वस्ति बनी रहेगी।

ऐसे जनकल्याण मानको को स्थापित कर न केवल किसानो का जीवन बचाया जा सके वरन उनमें मनोबल बढाकर और भी सक्षम बनाने के सतत प्रयत्न होगें।


विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र
ओ.बी. 11, एमपीईबी कालोनी
रामपुर, जबलपुर (मप्र) 482008
मो. 9425806252



(लेखक को सामाजिक लेखन हेतु रेड एंड व्हाइट पुरस्कार मिल चुका है)

Friday 22 April 2011

where r u?

where r u?
worried
call
mail
write
voice mail
anything
sms
pigeon
telepathy
laser uplink
telegraph
holme's signal
signal language you learnt in village on youtube
radio
encrypted signal over millitary network
note in a glass bottle throw it in the ocean
bat signal
smoke
light
seemingly unconnected spelling mistakes in college newspaper
disturbance in earths magnetic field
gravity wave
air writing with smoke planes
pizza delivery man messenger
strange impurities in crystal lattice of crystalline meteorite
oye ! kuch to kar
: OK last chance flying probe with 3-D projector

Friday 8 April 2011

अन्ना की जीत रामभरोसे की जीत है ...

अन्ना की जीत रामभरोसे की जीत है ... जानते हैं न आप रामभरोसे को .. मेरे देश का अंतिम नागरिक !
लेकिन केवल इस जीत से भ्रष्टाचार समाप्त नही हो जावेगा ...उसके लिये आम आदमी के चारित्रिक उत्थान के लिये भी ऐसे ही अभियान की जरूरत है ....

Wednesday 6 April 2011

चिंतन
जीवन भी २० .. २० क्रिकेट ही है


विवेक रंजन श्रीवास्तव
ओ बी ११ , विद्युत मण्डल कालोनी ,रामपुर ,जबलपुर म. प्र. ४८२००८


२० .. २० क्रिकेट की तेजी ही उसकी रोचक तथा रोमांचकता है , जिसके कारण वह लोकप्रिय हुआ है . आज के व्यस्त युग में हमारा जीवन भी बहुत तेज हो चुका है , लोगो के पास सब कुछ है , बस समय नही है, बहुत कुछ साम्य है जीवन और २० ..२० क्रिकेट में . सीमित गेंदो में अधिकतम रन बनाने हैंऔर जब फील्डिंग का मौका आये तो क्रीज के खिलाड़ी को अपनी स्पिन गेंद से या बेहतरीन मैदानी पकड़ से जल्दी से जल्दी आउट करना होता है . जिस तरह बल्लेबाज नही जानता कि कौन सी गेंद उसके लिये अंतिम गेंद हो सकती है , ठीक उसी तरह हम नही जानते कि कौन सा पल हमारे लिये अंतिम पल हो सकता है . धरती की विराट पिच पर परिस्थितियां व समय बॉलिंग कर रहे है, शरीर बल्लेबाज है, परमात्मा के इस आयोजन में धर्मराज अम्पायर की भूमिका निभा रहे हैं ,विषम परिस्थितियां , बीमारियाँ फील्डिंग कर रही हैं, विकेटकीपर यमराज हैं,ये सब हर क्षण हमें हरा देने के लिये तत्पर हैं . प्राण हमारा विकेट है .प्राण पखेरू उड़े तो हमारी बल्लेबाजी समाप्त हुई . जीवन एक २० .. २० क्रिकेट ही तो है , हमें निश्चित समय और निर्धारित गेंदो में अधिकाधिक रन बटोरने हैं . धनार्जन के रन सिंगल्स हो सकते हैं ,यश अर्जन के चौके , समाज व परिवार के प्रति हमारी जिम्मेदारियो के निर्वहन के रूप में दो दो रन बटोरना हमारी विवशता है . अचानक सफलता के छक्के कम ही लगते हैं . कभी-कभी कुछ आक्रामक खिलाड़ी जल्दी ही पैवेलियन लौट जाते हैं, लेकिन पारी ऐसी खेलते हैं कि कीर्तिमान बना जाते हैं, सबका अपना-अपना रन बनाने का तरीका है .
जीवन के क्रिकेट में हम ही कभी क्रीज पर रन बटोर रहे होते हैं तो कभी फील्डिंग करते नजर आते हैं , कभी हम किसी और के लिये गेंदबाजी करते हैं तो कभी विकेट कीपिंग , कभी किसी का कैच ले लेते हैं तो कभी हमसे कोई गेंद छूट जाती है और सारा स्टेडियम हम पर हंसता है . हम अपने आप पर झल्ला उठते हैं . जब हम इस जीवन क्रिकेट के मैदान पर कुछ अद्भुत कर गुजरते हैं तो खेलते हुये और खेल के बाद भी हमारी वाहवाही होती है ,रिकार्ड बुक में हमारा नाम स्थापित हो जाता है .सफल खिलाड़ी के आटोग्राफ लेने के लिये हर कोई लालायित रहता है . जो खिलाड़ी इस जीवन क्रिकेट में असफल होते हैं उन्हें जल्दी ही लोग भुला भी देते हैं .
अतः जरूरी है कि हम अपनी पारी श्रेष्ठतम तरीके से खेलें . क्रीज पर जितना भी समय हमें परमात्मा ने दिया है उसका परिस्थिति के अनुसार तथा टीम की जरूरत के अनुसार अच्छे से अच्छा उपयोग किया जावे . कभी आपको तेज गति से रनो की दरकार हो सकती है तो कभी बिना आउट हुये क्रीज पर बने रहने की आवश्यकता हो सकती है .जीवन की क्रीज पर हम स्वयं ही अपने कप्तान और खिलाड़ी होते हैं . हमें ही तय करना होता है कि हमारे लिये क्या बेहतर है ? हम जैसे शाट लगाते हैं गेंद वैसी और उसी दिशा में भागती है , जिस दिशा में हम उसे मारते हैं . जिस तरह एक सफल खिलाड़ी मैच के बाद भी निरंतर अभ्यास के द्वारा स्वयं को सक्रिय बनाये रखता है , उसी तरह हमें जीवन में भी सतत सक्रिय बने रहने की आवश्यकता है . हमारी सक्रयता ही हमें स्थापित करती है ,जब हम स्थापित हो जाते हैं तो हमें नाम , दाम और काम सब अपने आप मिलता जाता है . जीवन आदर्श स्थापित करके ही हम दर्शको की तालियां बटोर सकते हैं . .

Sunday 27 March 2011

कमलाप्रसाद जी ...विनम्र श्रद्धाजली

१९९२ तारसप्तक अर्धशती वर्ष .. मेरी प्रथम काव्य कृति "आक्रोश " प्रकाशित हुई थी , रींवा में कमलाप्रसाद जी के घर पर उन्हें भेंट की .. उन्होंने हौसला बढ़ाया ,फिर पाठक मंच के आयोजनो में .. जब तब मिलना होता रहा ... बड़े अपनेपन से मेरे तथा पिताजी के लेखन आदि पर हर बार पूछताछ व चर्चा करते थे ... पिताजी की कृति "अनुगुंजन " की भूमिका उन्होनें ही लिखी थी ..
विनम्र श्रद्धाजली
उनका दुखद देहावसान न केवल साहित्य जगत की वरन मेरी व्यक्तिगत क्षति है ...
वहाँ स्वर्ग में होगा उत्सव ,
है यहाँ धरा पर शोक ,
यह बुझा हुआ दीपक भी देगा
युग युग तक आलोक !

Tuesday 15 March 2011

आपदा प्रबंधंन सक्षम हो

आपदा प्रबंधंन सक्षम हो

आपदा प्रबंधंन का महत्व इसी से समझा जा सकता है कि आज अनेक संस्थायें इस विषय में एम.बी.ए. सहित अनेक पाठ्यक्रम चला रहे है। जापान या अन्य विकसित देषों में आबादी का घनत्व भारत की तुलना में बहुत कम है। अतः वहाॅं आपदा प्रबंधंन अपेक्षाकृत सरल है। हमारी आबादी ही हमारी सबसे बड़ी आपदा है, किंतु दूसरी ओर छोटे-छोटे बिखरे हुए गांवों की बढी संख्या से बना भारत हमें आपदा के समय किसी बडे नुकसान से बचाता भी है।

आम नागरिकों में आपदा के समय किये जाने वाले व्यवहार की षिक्षा बहुत आवष्यक है। संकट के समय संयत व धैर्यपूर्ण व्यवहार से संकट का हल सरलता से निकाला जा सकता है। नये समय में प्राकृतिक आपदा के साथ-साथ मनुष्य निर्मित यांत्रिक आकस्मिकता से उत्पन्न दुर्घटनाओं की समस्यायें बडी होती जा रही है। जैसे भोपाल गैस त्रासदी हुई थी तथा हाल ही जापान में न्यूक्लियर रियेक्टर में विस्फोट की घटना हुई है। खदान दुर्घटनायें, विमान, रेल व सडक दुर्घटनायें आंतकवादी तथा युद्ध की आपदायें हमारी स्वंय की तेज जीवनषैली से उत्पन्न आपदायें है। प्राकृतिक आपदाओं में बाढ, चक्रवात, भूकंप, सुनामी, आग की दुर्घटनायें सारे देष में जब-तब होती रहती है। इनसे निपटने के लिये सामान्य प्रषासन, पुलिस, अग्निषमन व स्वास्थ्य सेवाओं को ही सरकारी तौर पर प्रयुक्त किया जाता है। जरूरत है कि आपदा प्रबंधंन हेतु अलग से एक विभाग का गठन किया जाये।
फायर ब्रिगेड व एम्बुलेंस से झूठी खबरों के द्वारा मजाक करना, लोगो के असंवेदनषील व्यवहार का प्रतीक है। भेडिया आया भेडिया आया वाला मजाक कभी बहुत मंहगा भी पड सकता है। इंटरनेट, मोबाइल व रेडियो के माध्यम से आपदा प्रबंधंन में नये प्रयोग किये जा रहे है। हमें यही कामना करनी चाहिए कि आपदा प्रबंधंन इतना सक्षम हो जिससे दुर्घटनायें हो ही नहीं।



विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र
अतिरिक्त अधीक्षण इंजीनियर
ओ.बी. 11, एमपीईबी कालोनी
रामपुर, जबलपुर (मप्र) 482008
मो. 9425806252

Friday 4 March 2011

ऐसी बेटियो पर कौन नाज न करेगा

भारतीय कार्पोरेट जगत की कुछ सुप्रसिद्ध महिलायें

विवेक रंजन श्रीवास्तव
ओ बी ११ , विद्युत मण्डल कालोनी ,रामपुर ,जबलपुर म. प्र. ४८२००८

क्या नही महिला करि सकै , क्या नहिं समुद्र समाय ... सामान्यतः माना जाता है कि महिलाओ का कार्पोरेट जगत से भला क्या लेना देना . पर समय बदला है आज नई पीढ़ी की अनेक लड़कियां एम बी ए के सर्वोच्च संस्थानो में उच्च शिक्षा पा रही हैं . पिछली अधेड़ हो चली पीढ़ी में यद्यपि पुरुषों का ही बोलबाला है, किन्तु कुछ महिलाओ ने भी विभिन्न कंपनियो में शीर्ष स्थान अर्जित किया है . ऐसी ही कुछ महिलाओ के में चंदा कोचर , "बायोकॉन" की संस्थापक , किरण मजूमदार शॉ, ब्रिटानिया की सीईओ विनीता बाली , पेप्सी की इंद्रा न्यूई आदि शामिल हैं। विनीता बाली को हाल में ईटी अवॉर्ड्स में बिजनेसवुमेन ऑफ द ईयर का खिताब मिला था। महिलाओ की शीर्ष कार्पोरेट पदो में भागीदारी के चलते , इस साल भारतीय उद्योग जगत की सर्वाधिक शक्तिशाली महिला सीईओ की सूची भी बनाई गई। इसमें शीर्ष तीन स्थानों पर चंदा कोचर, बायोकॉन किरण मजूमदार शॉ और एचएसबीसी की नैना लाल किदवई हैं। भारतीय कार्पोरेट जगत की इन सुप्रसिद्ध महिलाओ के विषय में जानना रोचक है .ये महिलायें विभिन्न धर्म , भाषा भाषी , व देश के अलग अलग क्षेत्रो का प्रतिनिधित्व करती ये महिलायें इस तथ्य की सूचक हैं कि आने वाले समय में समूचे भारत में कार्पोरेट जगत में महिलाओ की सशक्त भागीदारी सुनिश्चित है .यह तथ्य भी महत्वपूर्ण है कि इन महिलाओ ने कार्पोरेट जगत के अलग अलग सैक्टर जैसे बैंकिंग , मीडीया , बायोटेक्नालाजी ,स्वास्थ्य आदि विभिन्न क्षेत्रो में अपनी योग्यता से सफलता के परचम लहराये हैं तथा नये कीर्तीमान बनाये हैं . प्रेरणा हैं ये महिलायें नई पीढ़ी की लड़कियो और उनके माता पिता के लिये .

पेप्सी की अध्यक्ष इंद्रा कृष्णमूर्ति न्यूई

पेप्सी मल्टीनेशनल सुप्रसिद्ध ब्रांड है जिसकी अध्यक्ष के रूप इंद्रा न्यूई ने विश्व स्तर पर ख्याति अर्जित की है . उन्हें फार्च्यून द्वारा घोषित ५० सशक्त महिलाओ की सूची में प्रथम स्थान पर रखा गया है .इसी तरह फोर्ब्स द्वारा घोषित विश्व की १०० सशक्त महिलाओ की सूची में भी उन्हें ६ वें स्थान पर रखा गया है . वर्ष २००१ में उन्होने पेप्सी ज्वाइन की . उन्होंने कार्पोरेट जगत में पेप्सी के सुढ़ृड़ विकास से अपनी पहचान बनाई . वे वर्ल्ड ईकानामिक फोरम , इंटरनेशनल रेस्क्यू फोरम , येल कार्पोरेशन आदि संस्थाओ से भी महत्वपूर्ण रूप में जुड़ी हुई हैं .



आईसीआईसीआई बैंक प्रमुख चंदा कोचर

चंदा कोचर आज एक जाना पहचाना चेहरा है . उन्होने एक प्रबंधन प्रशिक्षु के रूप में 1984 में आईसीआईसीआई में अपने कैरियर की शुरुआत की थी . मई 2009 में प्रबंध निदेशक और आईसीआईसीआई बैंक के मुख्य कार्यकारी अधिकारी के पद तक पहुँचने में उनकी मेहनत , लगन व काम के प्रति उनकी निष्ठा ही है .कोचर के नेतृत्व के में आईसीआईसीआई बैंक ने भारत में सर्वश्रेष्ठ खुदरा बैंक' और 'रिटेल बैंकिंग में उत्कृष्टता पुरस्कार' जीता. उन्हें भारत सरकार द्वारा पद्मभूषण पुरस्कार से सम्मानित किया गया है .

हावर्ड बिजनेस स्कूल से पढ़ी पहली भारतीय महिला नैना लाल किदवई

नैना लाल किदवई ने अपने कैरियर का प्रारंभ ए एन जेड ग्रिंडले से किया था मार्गेन स्टेनली , इन्वेस्टमेंट बोर्ड आफ इंडिया , एच एस बी सी आदि बैंकिंग व वित्तीय संस्थानो में उच्च पदो पर कार्यरत सुश्री नैना लाल किदवई को उद्योग व व्यापार में महत्वपूर्ण योगदान के लिये भारत सरकार ने पद्मश्री के सम्मान से विभूषित किया है .

एक सफल महिला उद्यमी,"बायोकॉन" की संस्थापक , किरण मजूमदार शॉ

बायोकॉन की संस्थापक अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक किरण मजूमदार शॉ को भारत सरकार के द्वारा जैव प्रौद्योगिकी के योगदान के लिए पद्मभूषण से सम्मानित किया गया है , उनकी कंपनी बायोकान जैव प्रौद्योगिकी , जैव दवाओ हेतु समाधान देने वाली कंपनी है.किरण मजूमदार ने १९७८ में इस कंपनी की स्थापना की थी . यह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त जैव दवा कंपनी है . मधुमेह रोग पर इस कंपनी ने विशद अनुसंधान कये हैं .


भारत के सबसे बड़े मीडिया ग्रुप टाइम्स आफ इण्डिया की अध्यक्ष इंदू जैन

वर्ष २००० में यूनाइटेड नेशन में विश्व शांति सम्मेलन को संबोधित करने का गौरव भारत के सबसे बड़े मीडिया ग्रुप टाइम्स आफ इण्डिया की अध्यक्ष इंदू जैन को मिला था . इंदु जैन स्वयं एक इंटरप्रेनर , एक अध्यात्मवादी, एक शिक्षाशास्त्री , कला और संस्कृति की बड़ी पोषक तथा एक मानवतावादी है.

डाक्टर स्वाति पीरामल

मुम्बई विश्वविद्यालय से मेडिकल की पढ़ाई के बाद स्वाती पीरामल ने इंडस्ट्रियल मेडिसिन में अध्ययन किया , हावर्ड विश्वविद्यालय से पब्लिक हैल्थ में मास्टर्स की योग्यता प्राप्त की . वे पीरामल लाइफ साइंसेज की वाइस चेयर परसन तथा पीरामल हैल्थ केयर लिमिटेड की निदेशक हैं . जन स्वास्थ्य के क्षेत्र में उनका उल्लेखनीय योगदान है .

मल्लिका श्रीनिवासन, निदेशक, ट्रैक्टर एंड फार्म इक्विपमेंट लिमिटेड

८५ करोड़ के टर्नओवर को २९०० करोड़ वार्षिक के टर्न ओवर में बदलने वाली मल्लिका श्रीनिवासन, निदेशक, ट्रैक्टर एंड फार्म इक्विपमेंट लिमिटेड के रूप में सुप्रतिष्ठित महिला हैं . उन्होंने मद्रास विश्वविद्यालय से एम ए की शिक्षा ग्रहण की , फिरउन्होने बिजनेस मैनेजमैंट की उच्च शिक्षा हेतु पेननसेल्वेनिया विश्वविद्यालय के वार्टस्न स्कूल में दाखिला लिया . शिक्षा के बाद से वे TAFE के अपने पारिवारिक व्यवसाय को सम्भाल रही हैं .

सुलज्जा मोटवानी

कायनेटिक मोटर कम्पनी की मैनेजिंग डायरेक्टर सुलज्जा मोटवानी कायनेटिक फाइनेंस व कायनेटिक मार्केटिंग सर्विसेज की भी देखरेख कर रही हैं . वर्ष २००२ में उन्हें यंग एचीवर अवार्ड से सम्मानित किया जा चुका है . प्रसिद्ध समाचार पत्रिका इंडिया टुडे ने उन्हें फेस आफ द मिलेनियम तथा वर्ल्ड इकानामिक फोरम ने ग्लोबल लीडर आफ तुमारो जैसे सम्मानो से नवाजा है . पुणे से बीकाम की पढ़ाई के बाद उन्होने पिट्सबर्ग से एमबीए की शिक्षा ग्रहण की है

अपोलो हास्पिटल्स की मैनेगिंग डायरेक्टर प्रीथा रेड्डी

मद्रास विश्वविद्यालय से कैमिस्ट्री की पढ़ाई के बाद पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन की शिक्षा पूर्ण कर , एशिया की सबसे सबल हास्पिटल चेन अपोलो हास्पिटल्स की मैनेगिंग डायरेक्टर प्रीथा रेड्डी ने अपोलो ग्रुप को नये पायदान पर ला खड़ा किया है . उनके मार्गदर्शन में बोन मैरो ट्रांस्प्लांटेशन, कार्ड ब्लड ट्रांस्प्लांटेशन आदि के क्षेत्र में अपोलो हास्पिटल नित नये कीर्तिमान बनाकर जन स्वस्थ्य के महत्वपूर्ण कार्य कर रहा है व एशिया में नई पहचान बना सका है .

पार्क होटल चेन की चेयर परसन प्रिया पाल

22 वर्ष की कम उम्र में ही अपने पिता का होटल व्यवसाय सम्भालने वाली प्रिया पाल के पिता सुरेन्द्र पाल की हत्या उल्फा उग्रवादियो के द्वारा कर दी गई थी , किन्तु अपने कौशल से प्रिया ने पार्क होटल चेन का सारा वर्तमान साम्राज्य स्थापित किया है . उन्हें यंग एंटरप्रेनर , पावरफुल बिजनेस वुमन , आदि सम्मान मिल चुके हैं .

अब बतलाइये कि ऐसी बेटियो पर कौन नाज न करेगा

Friday 28 January 2011

हिन्दी के प्रति वैश्विक षडयंत्र तो नही ?

हिन्दी के प्रति वैश्विक षडयंत्र तो नही ?
बीबीसी हिन्दी रेडियो सेवा बंद की जा रही है , जानकर हतप्रभ हूं ... ! हिन्दी का तो दुनिया भर में विस्तार हो रहा है और बीबीसी हिन्दी के प्रसारण बंद करने की बात कर रहे हैं .. इस पर पुनर्विचार करने की जरूरत है , किसी भी तरह बीबीसी हिन्दी के प्रसारण जारी रखे . यदि रेडियो प्रसारण बंद किये ही जाते हैं तो बीबीसी टीवी पर हिन्दी चैनल शुरू करे .. . बीबीसी एक सर्विस मात्र नही है यह एक मिशन है सच के पक्ष में ..जिसे करोड़ो श्रोता जुरे हुये हैं . इस तरह अचानक प्रसारण बंद करने का एक पक्षीय निर्णय लिया जाना गलत है .जर्मन रेडियो डायचेवेली पहले ही हिन्दी प्रसारण बंद कर चुका है .. यह सब क्यो ..हिन्दी के दुनिया भर में बढ़ते प्रभाव के कारण कोई साजिश तो नही ?

Sunday 9 January 2011

विवेक रंजन श्रीवास्तव "विनम्र" को व्यंग लेखन हेतु प्रतिष्ठित कैलाश गौतम सम्मान घोषित इलाहाबाद , विगत दिवस विश्व हिन्दी साहित्य सेवा संस्थान इलाहाबाद द्वारा वर्ष २०१० हेतु विभिन्न साहित्यिक विधाओ में लेखन हेतु सम्मान , अलंकरण घोषित किये गये . व्यंग विधा हेतु जबलपुर के विवेक रंजन श्रीवास्तव "विनम्र" को प्रतिष्ठित कैलाश गौतम सम्मान से सम्मानित करने की घोषणा की गई है . उक्त सम्मान १३ फरवरी २०११ को हिन्दुस्तानी एकेडेमी इलाहाबाद के सभागार में आयोजित राष्ट्रीय समारोह में अपरान्ह सत्र में प्रदान किया जावेगा . उल्लेकनीय है कि श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव को उनकी व्यंग कृति राम भरोसे हेतु पहले भी अभियान द्वारा दिव्य अलंकरण से सम्मानित किया जा चुका है . उनकी नई व्यंग "कृति कौआ कान ले गया " राष्ट्रीय स्तर पर चर्चित है .

विवेक रंजन श्रीवास्तव "विनम्र" को व्यंग लेखन हेतु प्रतिष्ठित कैलाश गौतम सम्मान घोषित

इलाहाबाद , विगत दिवस विश्व हिन्दी साहित्य सेवा संस्थान इलाहाबाद द्वारा वर्ष २०१० हेतु विभिन्न साहित्यिक विधाओ में लेखन हेतु सम्मान , अलंकरण घोषित किये गये . व्यंग विधा हेतु जबलपुर के विवेक रंजन श्रीवास्तव "विनम्र" को प्रतिष्ठित कैलाश गौतम सम्मान से सम्मानित करने की घोषणा की गई है . उक्त सम्मान १३ फरवरी २०११ को हिन्दुस्तानी एकेडेमी इलाहाबाद के सभागार में आयोजित राष्ट्रीय समारोह में अपरान्ह सत्र में प्रदान किया जावेगा . उल्लेकनीय है कि श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव को उनकी व्यंग कृति राम भरोसे हेतु पहले भी अभियान द्वारा दिव्य अलंकरण से सम्मानित किया जा चुका है . उनकी नई व्यंग "कृति कौआ कान ले गया " राष्ट्रीय स्तर पर चर्चित है .