Saturday 27 February 2010

विचार वीथी

DEBATE:हुसैन का सम्मान या भारतीयों का अपमान..?
SENT:26-Feb-2010 04:15COMMENT:कला , संगीत , साहित्य की ताक़त कट्टरपंथियो की ताक़तों और राष्ट्रों की सीमाओं से कही ऊपर हैं. हुसैन अकेले नहीं हैं, सलमान रश्दी, तस्लीमा नसरीन.सभी की अपनी अपनी कहानियाँ हैं.हाँ यह ज़रूर है कि कलाकार को भी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का ओछा फायदा नही उठाना चाहिए. किसी के मन को आहत करना कभी भी आदर्श नही कहा जा सकता,सम्मान के लिए सम्मान का सदा सम्मान होता है, पर यदि किसी को चिढ़ाने के लिए कोई झूठा सम्मान दिया जाए तो उसे सामाजिक स्वीकार्यता मिलनी मुश्किल है.

DEBATE:बजट से क्या है उम्मीदें
SENT:23-Feb-2010 13:35COMMENT:बजट से उम्मीदें तो बहुत हैं पर वित्त मंत्री जी क्या-क्या पूरा कर सकेंगे, सरकार चलाने के लिए उन्हे तो पैसा चाहिए ही, बार-बार के चुनावो ने ख़ज़ाना ख़ाली कर रखा है, फिर भी एक कर्मचारी होने के नाते बड़ी राहत की आशा है ... अपेक्षा है कि देश का अंतिम व्यक्ति "रामभरोसे" दो जून, भर पेट खा सके और सम्मान का जीवन जी सके कुछ ऐसा हो बजट.


DEBATE:समलैंगिकता के लिए निलंबन कितना जायज़...?
SENT:23-Feb-2010 13:23COMMENT:मै इस निलंबन को उचित मानता हूं, हम सामाजिक प्राणी हैं और सामाजिक मूल्यों का हमें पालन करना ही चाहिए, तभी समाज सुव्यवस्थित रह सकता है. यदि समलैंगिकता को आज योग्यता के कारण गौण माना गया तो कल भ्रष्टाचार को, परसों अवैद्य प्रेम संबंधों को तरजीह मिलेगी और हमारा सामाजिक ढांचा चरमरा जाएगा.


DEBATE:क्यों फैल रहा है नक्सली आंदोलन?
SENT:17-Feb-2010 14:10COMMENT:शुतुरमुर्ग की तरह रेत में अपना सिर छिपा कर हम कथित बुद्धिजीवी अब और चुप नही रह सकते. हमें नक्सलवाद के विरुद्ध खुलकर सामने आना ही होगा. पहले नक्सल प्रभावित पिछड़े लोगों को समाज में समाहित कर उन्हें नक्सलवादियों से विमुख करना होगा और साथ-साथ नक्सलवादियों को भी क्षमा दान देकर, देश की मूलधारा में मिलाकर ही नक्सलवाद का अंत किया जा सकता है. आइए कामना करें कि देश से जल्दी से जल्दी नक्सलवाद का पूर्णरूपेण अंत हो. नक्सली हिंसा के शिकार लोगों को यही हमारी पीढ़ी की सच्ची श्रद्धांजली होगी.


DEBATE:भारत में मीडिया की भूमिका
SENT:14-Feb-2010 16:41COMMENT:मीडिया में संपादन का महत्वपूर्ण स्थान होता है , पर लाइव मीडिया ने सबसे पहले खबर दिखाने के चक्कर में संपादन को दरकिनार कर दिया है , सबसे पहले आगरा की भारत पाकिस्तान शिखर वार्ता को विफल करने मे , विगत वर्ष मुम्बई हमले में आतंकियो को अप्रत्यक्ष मदद करने में मीडिया की यही स्थिति हास्यास्पद बनी . बीबीसी जैसी जबाबदारी और स्वनियंत्रण जरूरी है




DEBATE:क्या सरकार बातचीत को लेकर गंभीर है?
SENT:09-Feb-2010 13:13COMMENT:यदि सरकार गंभीर नही है तो उसे गंभीर होना चाहिए. नक्सलवाद कभी एक समर्पित आंदोलन था जो बाद में दिग्भ्रमित होता गया. इसके बाद भी नक्सलवादी पृथकतावादी नही है.वे सर्वहारा के लिए संघर्ष करने का स्वांग भले कर रहे हों पर कर तो रहे हैं. इसलिए उनसे बातचीत का रास्ता ठीक ही है.


DEBATE:क्या आसान निशाना बन रही हैं ख़ास हस्तियां...?
SENT:07-Feb-2010 03:01COMMENT:बदनाम हुए तो क्या नाम न हुआ ? ... किसी सुपरिचित नाम का विरोध करो और खुद को मशहूर करो ... अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का यह गलत लाभ लिया जा रहा है


DEBATE:पाकिस्तान मामले पर कौन सही: शाहरुख़ या शिवसेना?
SENT:07-Feb-2010 02:55COMMENT:यह सारा प्रकरण कुछ ऐसा है जैसाकि डाकू चोर पर उंगुली उठाए.


DEBATE:शिव सेना की राजनीति
SENT:02-Feb-2010 03:07COMMENT:ठाकरे एक अनियंत्रित नेता हैं. मुझे तो लगता है कि धर्म निरपेक्षता नहीं देश को धर्म गुरू की जरूरत है जो ऐसे दिग्भ्रमित नेताओ को आत्मअवलोकन का सही पाठ पढ़ा सके. ऐसी हर हरकत का कानूनी मुकाबला पूरी ताकत से किया जाना चाहिए, जरूरी हो तो कोर्ट को स्वयं हस्तक्षेप करना चाहिए . कानून कमजोर हो तो देश की अंण्डता के लिए कानून बना कर ठाकरे पर कड़ी कार्यवाही की जानी चाहिए.


DEBATE:स्मारकों की सुरक्षा के लिए विशेष दस्ते का गठन कितना जायज़...?
SENT:02-Feb-2010 03:00COMMENT:जब संविधान निर्माताओ ने आरक्षण जैसी व्यवस्था की रही होगी तो उन्होने कभी नहीं सोचा होगा कि दलितों के नाम पर राष्ट्रीय धन का ऐसा दुरुपयोग भी किया जाएगा. मायावती एक अनियंत्रित नेता हैं. मुझे तो लगता है कि धर्म निरपेक्षता नहीं देश को धर्म गुरू की जरूरत है जो ऐसे दिग्भ्रमित नेताओ को आत्मअवलोकन का सही पाठ पढ़ा सके. यह स्मारकों की सुरक्षा के लिए विशेष दस्ते का गठन बिल्कुल ग़लत है.


DEBATE:भाषा के आधार पर रोज़गार?
SENT:24-Jan-2010 04:29COMMENT:खेद है कि लोकतंत्र की स्वतंत्रता के नाम पर हमारे देश में कुछ भी कहा जा सकता है , भाषा , धर्म संप्रदाय के नाम पर रोजगार के ऐसे बयानों को देशद्रोह, संविधान का उल्लंघन कहा जाना चाहिए ...


DEBATE:हॉकी की इतनी दुर्दशा के ज़िम्मेदार कौन...?
SENT:18-Jan-2010 14:51COMMENT:हॉकी हमारी राष्ट्रीय पहचान रही है, जसदेव सिंह की रेडियो कमेंट्री सुनकर जो रोमांच होता है वह अविस्मरणीय है. इसकी वर्तमान स्थिति के लिए किसी एक को कोसने की अपेक्षा समूचे माहौल को बदलने की जरूरत है. हॉकी ही नहीं अन्य खेलो में भी जो पदक इत्यादि देश के नाम पर मिलते हैं उनके लिये संग्रहालय बनाया जाना चाहिए.


DEBATE:शिक्षा में गिरावट का ज़िम्मेदार कौन?
SENT:18-Jan-2010 14:38COMMENT:जिसका जो काम है उसे वही करने दिया जाए तो सब कुछ ठीक चले. शिक्षा,शिक्षक और स्कूलों से नित नये प्रयोग करने पर प्रतिबंध होना चाहिए. कभी परीक्षा प्रणाली बदलकर कोई मंत्री जी अपना नाम कमाना चाहते हैं, तो कोई स्कूलों को स्वास्थ्य के नाम पर किचन में बदल देता है, कभी शिक्षक चुनाव कराते है तो कभी जनगणना. यह सब न हो तो शिक्षा की गुणवत्ता बनी रहे.


DEBATE:कैसे याद करेंगे ज्योति बसु को
SENT:18-Jan-2010 14:33COMMENT:भारतीय इतिहास में केवल ज्योति दा और सोनिया गाँधी जी ही दो ऐसे नेता हैं जो चाहते तो सहज ही प्रधानमंत्री बन सकते थे, पर उन्होने इसे अस्वीकार कर दिया.
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2 comments:

गर्दूं-गाफिल said...

रंग लेकर के आई है तुम्हारे द्वार पर टोली
उमंगें ले हवाओं में खड़ी है सामने होली

निकलो बाहं फैलाये अंक में प्रीत को भर लो
हारने दिल खड़े है हम जीत को आज तुम वर लो
मधुर उल्लास की थिरकन में आके शामिल हो जाओ
लिए शुभ कामना आयी है देखो द्वार पर होली

गर्दूं-गाफिल said...

achchhee kavita hai