Sunday 25 April 2010

अब समझ आया न कि क्यो नही खुल रहे थे नये मेडिकल कालेज ?


अब समझ आया न कि क्यो नही खुल रहे थे नये मेडिकल कालेज  ?  और क्यो है मेडिकल कालेजो की भारी भरकम फीस ? क्यो डाक्टरो की सेवानिवृति आयु ६५ बरस करनी पड़ रही है ?
मेडिकल कांउसिल ऑफ इंडिया (एमसीआई) के अध्यक्ष केतन देसाई के पास से कथित तौर पर 1801.5 करोड़ रुपए नकद और डेढ़ टन स्वर्ण आभूषण बरामद किए हैं। दिल्ली व अहमदाबाद में उसके निवासों और लॉकरों से यह बरामदगी की गई।

पंजाब के एक मेडिकल कालेज को मान्यता देने के बदले दो करोड़ रुपए की रिश्वत मांगने के आरोप में देसाई को गुरुवार रात को दिल्ली से गिरफ्तार किया गया था। फिलहाल वह पांच दिनों की पुलिस हिरासत में है। सीबीआई उससे पूछताछ कर रही है।

यहां सीबीआई के सूत्रों ने बताया कि देसाई को आगे की जांच के लिए रविवार को अहमदाबाद ले जाया जाएगा। अभी तक की पूछताछ में इस बात के संकेत मिले हैं कि उसके पास से लगभग 2,500 करोड़ रुपए बरामद हो सकते हैं।

देसाई ने पूछताछ के दौरान शुरुआत में प्रधानमंत्री कार्यालय में पहचान होने का दावा करते हुए सहयोग करने से इनकार कर दिया। लेकिन बाद में उसने मुंह खोलना शुरू किया। जब जांच एजेंसी ने उससे पूछा कि उसने रकम कहां रखी है तो पहले तो उसने विरोधाभासी बयान दिए। उसने हरियाणा, राजस्थान और उत्तरप्रदेश में कुछ जगहों के नाम लिए।

रिकार्डे से छेड़छाड़ : 

सीबीआई द्वारा बरामद फाइलों और दस्तावेजों से पता चलता है कि देसाई ने मेडिकल कालेजों को मान्यता दिलवाने के लिए रिकार्डे से छेड़छाड़ भी की थी। जिन कालेजों ने नियत तिथि के बाद आवेदन दायर किए थे उन्हें भी 25 से 30 करोड़ रुपए लेकर मंजूरी दी गई। कई कालेजों को अवैध रूप से मंजूरी देने की बात पता लगने के बाद सीबीआई ने अब अनुमति देने से जुड़े सभी रिकार्डे और फाइलों की जांच करने का फैसला किया है।

अपनी पसंद के इंस्पेक्टर : 

देसाई ने कालेजों को मंजूरी से पहले वहां के :औचक निरीक्षण– के लिए अपनी पसंद के 20 इंस्पेक्टर नियुक्त किए थे। इनमें मालती मेहरा और सुरेश शाह भी शामिल हैं। ये इंस्पेक्टर देसाई के एजेंट के तौर पर काम करते थे और कालेज को मंजूरी देने के लिए रेट तय करने में भी इनकी अहम भूमिका होती थी। ये लोग कभी-कभी कलेक्शन एजेंट के तौर पर भी काम करते थे।








भड़ास में मेरी १७अगस्त २००८ की पोस्ट पढ़ें 




कब तक हम विदेश भैजेगे अपने बच्चो को डाक्टरी पढ़ाने ..?
इन दिनो देश के ढ़ेरो बच्चे डाक्टरी की शिक्षा पाने के लिये चीन , रूस आदि देशो की ओर जा रहे है . इससे जहां एक तरफ भारत को आर्थिक नुकसान हो रहा है वही लोगो को असाधारण असुविधा हो रही है . पर बचचो के सुखद भविष्य की कामना में लोग यह कदम उठाने को विवश है. ईन देशो से मेडिकल शिक्षित बच्चो को देश में प्रैक्टिस करने के लिये ima की एक परीक्षा पास करणी होती है .
यदि सरकार आर्थिक कारणौ से नये मेडिकल कालेज नही खौल पा रही है तो , निजी क्षेत्र को मेडिकल कालेज शुरू करने दे , इन कालेजो से पास बचचे ima की वही परीक्षा पास करके अपनी प्रैक्टिस कर सकते है .
देश की आबादी जिस तेजी से बढ़ रही है यदि मेदिकल कालेज नही खोले गये तो कुछ ही वर्षो में डाक्टर ढ़ूढ़े नही मिलेंगे .
क्या सोचते है आप?
Posted by Vivek Ranjan Shrivastava  
1 comments:


रजनीश के झा (Rajneesh K Jha) said...
विवेक जी,
जहाँ तक डॉक्टरों का सवाल है, आप निश्चिंत रहे क्यूंकि हमारे देश में डॉक्टरों का (लाला टाइप धंधे) अकाल कभी नही पड़ने वाला है और विदेश जाने वाले बच्चे लालागिरी करने की शिक्षा लेने ही जाते हैं, जहाँ तक डॉक्टरों का सवाल है सो हमारे देश में सच्चे डॉक्टरों का हमेशा से अकाल रहा है और उसका देश या विदेश से कोई सरोकार कभी नही रहा है


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