Friday, 29 April, 2011

किसानों की आत्महत्या के कारण व समाधान: सुझाव

किसानों की आत्महत्या के कारण व समाधान: सुझाव


हमारी अर्थव्यवस्था कृषि पर व्यापक रूप से आधारित है। अतः हमें किसानों हेतु ऐसा वातावरण बनाना आवष्यक है जिससे उनका आर्थिक उन्नयन हो एवं उनमें अपने भविष्य के प्रति आष्वस्ति हो।

1. किसानो के कल्याण की विभिन्न सरकारी योजनाओं अलग-अलग विभागो से चलाई जा रही है जिसके लिए किसानों को कृषि विभाग, राजस्व विभाग, बैंको, पषुपालन विभाग, पंचायतो आदि-आदि के चक्कर लगाने पडते है एवं उनका शोषण भी होता है। अतः मेरा सुझाव है ऐसी व्यवस्था की जावे जिससे समन्वित रूप से केवल एक ही बिंदु पर संपर्क करने से किसान को सारी कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी मिल सके एवं वहीं से उसका लाभ भी उसे मिल सके। इस तरह की व्यवस्था से योग्य उम्मीदवार को सरकारी योजनाओं का समुचित लाभ मिल सकेगा एवं किसी तरह का दोहराव भी नहीं होगा।

2. दोहरी फसल के पांच एकड से बडे किसानों को जो स्वंय खेती का कार्य न कर मजदूरो के माध्यम से खेती करवाते है सब्सिडी वाली सरकारी योजनाओ का लाभ न दिया जावे, होता यह है कि ऐसे बडे किसान ही इन कल्याणकारी योजनाओं का लाभ ले लेते है । वे ही सरकारी कर्मचारियों को भ्रष्ट तरीको से लाभ देने हेतु प्रेरित करते है एवं वास्तविक लाभ के गरीब किसान वंचित रह जाते है।

3. बडी बीमारियों कैंसर, हृदय रोग आदि तथा ऐसी बीमारियाॅ जिनमे निरंतर औषधी सेवन करना पडता है जैसे मधुमेह, रक्तचाप आदि हेतु सारे छोटे किसानो का चिकित्सा बीमा करवाया जावे इससे किसानो में जीवन के प्रति आष्वस्ति बनी रहेगी।

ऐसे जनकल्याण मानको को स्थापित कर न केवल किसानो का जीवन बचाया जा सके वरन उनमें मनोबल बढाकर और भी सक्षम बनाने के सतत प्रयत्न होगें।


विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र
ओ.बी. 11, एमपीईबी कालोनी
रामपुर, जबलपुर (मप्र) 482008
मो. 9425806252



(लेखक को सामाजिक लेखन हेतु रेड एंड व्हाइट पुरस्कार मिल चुका है)

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