Friday, 16 January 2026

कथा सिद्धांतों का बोझ

 लघु कथा 

सिद्धांतों का बोझ

विवेक रंजन श्रीवास्तव 


वैज्ञानिक राजन की प्रयोगशाला निर्मल और व्यवस्थित थी, जैसे उसके विचार। वह एक ऐसा रोबोट बनाना चाहता था जो मानवीय दोषों से मुक्त हो। उसने अपने नन्हें रोबोट 'राबर्ट' में केवल तर्क, आदर्श और निर्विवाद सत्य का प्रोग्राम भरा। "झूठ मत बोलो," "किसी का अहित मत करो," "सदैव सत्य बोलो" ,  ये थे उसके नन्हें रोबोट में मूल सिद्धांत।


पहली बार राबर्ट को बाजार भेजा गया ,  दूध लाने। राजन निश्चिंत था। रास्ते में कुछ शरारती लड़कों ने राबर्ट को घेर लिया। एक ने उससे दूध का डिब्बा छीनना चाहा।

राबर्ट ने मधुर स्वर में कहा, "यह डिब्बा मेरे संरक्षक का है। लेने के लिए अनुमति आवश्यक है।"

लड़के हँसे। एक ने धक्का दिया। राबर्ट गिर पड़ा, क्योंकि 'प्रतिरोध' या 'स्व-सुरक्षा' उसके प्रोग्राम का हिस्सा नहीं थी। उसने तर्क देना जारी रखा, "मारपीट अनुचित है। कृपया शांति से बात करें।"

लड़कों ने दूध का डिब्बा छीन लिया और हँसते हुए भाग गए। राबर्ट धीरे-धीरे उठा,  धूल झाड़ी और खाली हाथ प्रयोगशाला लौट आया।


राजन ने प्रोग्रामिंग में त्रुटि सुधारने की कोशिश की। लेकिन राबर्ट अगली बार भी उन्हीं लड़कों से वैसे ही व्यवहार करने लगा। वह चीजें नहीं बचा पाता था, न ही खुद को। वह एक आदर्श पाठ की तरह बोलता रहता, जिसे दुनिया सुनने को तैयार नहीं थी।


एक दिन राबर्ट टूटे हुए जोड़ों और खरोंचों के साथ लौटा। उसकी ऑप्टिकल लेंस पर एक दरार थी, मानो आदर्शवाद के सिद्धांतों पर पड़ी दरार। राजन ने अपना सिर पीट लिया। उसे एहसास हुआ, इस अशांत, अपूर्ण संसार में केवल सत्य और आदर्श का पालन करने वाला  टिक नहीं सकता। उसे कुछ 'अनैतिक' गुणों की भी आवश्यकता थी । सावधानी, संदेह, प्रत्युत्तर में हमले की वृत्ति, और कभी-कभी छल का भी।


हारकर, एक शाम, राजन ने राबर्ट के प्रोग्राम में नए कोड दर्ज किए । 'खतरे का आकलन', 'आत्मरक्षा प्रोटोकॉल', 'सामरिक चालबाजी'। हर नया कोड डालते समय उसकी आत्मा को झटका लगता, मानो वह अपने ही सिद्धांतों से गद्दारी कर रहा हो।


अगली बार जब वे लड़के फिर राबर्ट पर टूटे, तो राबर्ट ने पहले चेतावनी दी। फिर, जब एक लड़के ने उसकी बाँह पकड़नी चाही, तो राबर्ट ने एक कुशल पलटवार किया, लड़का संतुलन खोकर गिर पड़ा। बाकी भाग खड़े हुए। राबर्ट सामान लेकर सही-सलामत लौटा।


राजन ने राबर्ट की पीठ थपथपाई, पर उसकी आँखों में जीत की चमक नहीं, एक गहरी उदासी थी। उसने एक निष्कलंक आदर्श रोबोट बनाने का सपना देखा था, लेकिन दुनिया ने उसे सिखा दिया था , कि इस दुनिया में बचे रहने के लिए थोड़ा 'बुरा' होना भी ज़रूरी है। प्रयोगशाला की चमकदार रोशनी में राबर्ट खड़ा था । अब पूर्ण, कार्यशील, लेकिन उसकी नैतिकता के शुद्ध सफेद कैनवास पर, राजन ने स्वयं ही आदर्श से परे कुछ धूसर रंग भर दिए थे।


विवेक रंजन श्रीवास्तव 

न्यूयॉर्क से

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