Wednesday, 29 August 2012


नाम करेगा रोशन , जग में तेरा राजदुलारा ...
जबलपुर क्राइस्ट चर्च से वर्ष २०१० में १२ की परीक्षा पास करके , आई आई टी में सेलेक्शन होने के बाद भी अमिताभ श्रीवास्तव ने विज्ञान में अभिरुचि के चलते भारतीय विज्ञान संस्थान बैंगलोर का बी एस कोर्स ज्वाइन किया . किशोर वैज्ञानिक के रूप में देश के चुनिंदा १०० बच्चो का चयन प्रति वर्ष आई आई एस सी में होता है . वहां जल्दी ही अमिताभ ने पहले २ बच्चो में अपना स्थान बना लिया . २००६ से प्रति वर्ष किसी न किसी एशियन देश में किशोर युवा वैज्ञानिको का एक कैम्प हो रहा है . अब तक ताइवान , बाली , इणडोनेशिया , मुम्बई भारत सहित कोरिया में यह वार्षिक आयोजन  हो चुका है . इस वर्ष २४ अगस्त से १ सितम्बर तक ६ वां एशियन साइंस कैम्प जेरूसलम इजराइल में चल रहा है . जिसमें नोबल पुरस्कार से सम्मानित वैज्ञनिक बच्चो से सीधा संवाद कर रहे हैं . आयोजन के उद्घाटन के अवसर पर इजराइल के राष्ट्रपति ने प्रीति भोज में आशा व्यक्त की कि आगामी समय में विज्ञान ही दुनिया को परस्पर जोड़ने का कार्य करेगा . भारत के सर्वोच्च विज्ञान संस्थानो से कुल २९ बच्चे किशोर वैज्ञानिक के रूप में इस अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन में हिस्सेदारी कर रहे हैं . अमिताभ श्रीवास्तव इस विज्ञान सम्मेलन में आई आई एस सी के प्रतिनिधि के रूप में भारत का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं . अमिताभ म. प्र. पूर्वी क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी में अतिरिक्त अधीक्षण इंजीनियर मण्डला के श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव व कल्पना श्रीवास्तव के सुपुत्र हैं , वे वरिष्ठ कवि प्रो सी बी श्रीवास्तव के नाती हैं .

Friday, 10 August 2012

पं. रामेश्वर गुरू कलम से ही नहीं मैदानी कार्यो से भी आम आदमी के प्रतिनिधी पत्रकार


पं. रामेश्वर गुरू  कलम से ही नहीं मैदानी कार्यो से भी आम आदमी के प्रतिनिधी पत्रकार

....विवेक रंजन श्रीवास्तव
ओ बी ११ , विद्युत मण्डल कालोनी , रामपुर , जबलपुर
मो ९४२५८०६२५२

वर्ष १९५० का दशक , तब जबलपुर एक छोटा शहर था। कुल दो कालेज थे। विश्वविद्यालय नहीं था। तब शहर के साहित्य के केंद्र में पं. भवानी प्रसाद तिवारी तथा रामेश्वर गुरू थे।शहर के अन्य व्यक्ति जो बहुत अध्ययनशील तथा रचनाशील थे, वे थे बाबू रामानुजलाल श्रीवस्तव ऊंट’ , नाटककार बाबू गोविंद दास , सुभद्रा कुमारी चौहान भी थी, जिनका बड़ा रौब-दाब था। परसाई जी व अन्य युवा लेखक व पत्रकार इन सुस्थापित व्यक्तित्वो से संपर्क में रहकर अपनी कलम को दिशा दे रहे थे. पं रामेश्वर गुरु ने पत्रकारिता के शिक्षक की भूमिका भी इन नये लेखको के लिये स्वतः ही अव्यक्त रूप से निभाई .
‘अमृत बाजार पत्रिका’ दैनिक समाचार पत्र के प्रतिनिधि के रूप में पं रामेश्वर गुरू
वर्ष १९४६ में पं. रामेश्वर गुरू जी जबलपुर के प्रतिष्ठित क्राइस्ट चर्च के हाई स्कूल में अध्यापक थे पर साथ ही वे आजीवन एक सजग पत्रकार भी रहे । उनकी पत्रकारिता में भी रचनात्मक गुण थे। अपने लेखन से ‘अमृत बाजार पत्रिका’ दैनिक समाचार पत्र के प्रतिनिधि के रूप में उन्होने जबलपुर की सकारात्मक छबि राष्ट्रीय स्तर पर बनाई .
प्रहरी के संपादक  
वर्ष १९४७ मे तिवारी जी और गुरू जी के संपादकत्व में ‘प्रहरी’ साप्ताहिक पत्र जबलपुर से निकला। यह तरूण समाजवादियों का पत्र था और प्रखर था। इसी पत्र में परसाई उपनाम से हरिशंकर परसाई जी की  पहली रचना छपी . परसाई जी ने अपने संस्मरण में लिखा है कि  प्रहरी के माध्यम से ही  गुरू जी से उनका परिचय हुआ। वे उनके घर जाने लगे। उनके निकट जाने पर परसाई जी को मालूम हुआ कि गुरू जी कितने अध्ययनशील साहित्य प्रेमी और रचनाकार थे।
प्रहरी’ में वे नियमित लिखते थे। गंभीर भी, आलोचनात्मक भी और व्यंग्यात्मक भी। उनकी भाषा बहुत प्रखर और बहुत जीवंत थी। वे ‘प्रहरी’ में इस प्रतिभा के साथ बहुत धारदार लेख लिखते थे। उनके लेखों में  गहरी संवेदना होती थी। वे गरीबों, शोषितों के पक्षधर थे। इस वर्ग के लोगों पर उनके रेखाचित्र बहुत संवेदनपूर्ण और बहुत मार्मिक है। दूसरी तरफ़ वे सत्ता और उच्चवर्ग की आत्मकेंद्रित जीवन शैली के विरोधी थे। सत्ता चाहें राजनैतिक हो या आर्थिक या साहित्यिक- उस पर वे प्रहार करते थे। घातक प्रव्रत्तियों में लिप्त बड़े व्यक्तियों पर वे बिना किसी डर के बहुत कटु प्रहार करते थे।
पं. रामेश्वर गुरू का व्यंग काव्य
‘प्रहरी’ में वे व्यंग्य काव्य भी लिखते थे जिसका शीर्षक था- बीवी चिम्पो का पत्र। यह हर अंक में छपता था और लोग इसका इंतजार करते थे। उसी पत्र में ‘राम के मुख से’ कटाक्ष भी वे लिखते थे।
पं. रामेश्वर गुरू का बाल साहित्य
‘प्रहरी’ में एक पृष्ठ बच्चों के लिए होता था। उसे गुरू जी संपादित करते थे और इसमें लिखते भी थे। यह पृष्ठ सुदन और मुल्लू के नाम से जाता था। "सुदन" पं भवानी प्रसाद तिवारी जी का घर का नाम था और "मुल्लू" गुरू जी का। गुरू जी बाल साहित्य में बहुत रूचि लेते थे और उन्होंने बच्चों के लिए नाटक भी लिखे थे। ‘प्रहरी’ की फ़ाइलों में उनका लिखा ढेर सारा बाल साहित्य है, जिसके संकलन तैयार किये जाने चाहिये .
‘वसुधा’ मासिक पत्रिका में सहयोग
पं. रामेश्वर गुरू का बहुत महत्वपूर्ण साहित्यिक कार्य ‘वसुधा’ मासिक पत्रिका का पौने तीन वर्षों तक प्रकाशन था। इस पत्रिका में सहयोग सबका था, पर ‘वसुधा’ तब बिखरे हुए प्रगतिशील साहित्यकारों की पत्रिका थी।गुरू जी बौद्धिक भी थे और भावुक भी। वे छायावादी युग के थे, मगर छायावादी कविताएं उन्होंने नहीं लिखी। वे दूसरे प्रकार के कवि थे। माखनलाल चतुर्वेदी का प्रभाव उन पर था, पर वह प्रभाव प्यार, मनुहार, राग का नहीं, राष्ट्र्वाद का था। भाषा श्री माखनलाल जी से प्रभावित थी। कवि भवानी प्रसाद मिश्र उनके अभिन्न मित्र थे। कुछ प्रभाव उनका भी रहा होगा। गुरू जी की कविताओं पर न निराला का प्रभाव है, न पंत का। इस मामले में वे सर्वथा स्वतंत्र थे। उनकी कविताओं में देश प्रेम, सुधारवादिता, और जनवादिता है। वे संवेदनशील थे और गरीब शोषित वर्ग के प्रति उनकी स्थाई सहानुभूति थी। वे इस वर्ग के संघर्ष, अभाव और दुख पर कविताएं लिखते थे। वे उदबोधन काव्य भी लिखते थे। तरूणों का, मजदूरों का, संघर्ष और परिवर्तन के लिए आव्हान अपनी कविताओं में वे करते थे।
उनकी शब्द-सामर्थ्य बहुत थी और वे मुहावरों के धनी  थे। वे बहुत अच्छी बुंदेली जानते थे और उनकी बुंदेली कविताएं बहुत अच्छी है। व्यंग्य काव्य अकसर वे बुंदेली में लिखते थे।

पं. रामेश्वर गुरू  मैदानी कार्यो से भी जनता के प्रतिनिधी पत्रकार
पं. रामेश्वर गुरू ने जनता के प्रतिनिधी पत्रकार की भूमिका न केवल कलम से वरन अपने मैदानी कार्यो से भी निभाई है .  सुभद्राकुमारी चौहान की प्रतिमा की स्थापना नगर निगम कार्यालय के सामनेवाले लान में उन्होने ही  कराई। पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी के अभिनंदन में समारोह आयोजित किया। चिकित्सक और राजनीतिज्ञ डा. डिसिल्वा की स्मृति में उन्होंने डिसिल्वा रतन श्री माध्यमिक विद्यालय की  स्थापना कराई। वे जब शहर के मेयर बने, तब महात्मा गांधी और पंडित मदनमोहन मालवीय की आदमकद प्रतिमाओं की स्थापना उन्होने करवाई। अपने मित्र प्रसिद्ध पत्रकार हुकुमचंद नारद की स्मृति में उन्होंने विक्टोरिया अस्पताल में विश्राम-कक्ष भी बनवाया।
इस तरह पं. रामेश्वर गुरू  ने पत्रकारिता के वास्तविक मायने और आदर्श हमारे सामने रखे हैं , जिनके अनुसार पत्रकारिता केवल स्कूप स्टोरी या सनसनी फैलाना नही वरन समाज और लोकतंत्र के चौथे  स्तंभ के रूप में जनहितकारी सशक्त भूमिका का निर्वहन है .

Saturday, 4 August 2012

लव मैरिज या अरेंज्ड मैरिज ?


लव मैरिज या अरेंज्ड मैरिज ?


लव तो हो ही जाता है , दो युवाओ में .

पर शादी केवल लव ही तो नही है !

सक्सेजफुल शादी के लिये .

लव के साथ जरूरी होता है ,

कमिटमेंट भी . फेथ भी . म्युचुएल रिस्पेक्ट भी .

अब परिवार नहीं होते बहुत बड़े ,

भाई बहिन , माँ पिता से

जो प्रगाढ़ रिलेशन होते हैं ,लड़के या लड़की के ,

वे शादी के बाद भी बने रहें ,

इसलिये जरूरी होता है एडजसमेंट भी , शादी में.

मतलब अरेंज्ड लव मैरिज हो

या
अरेंज्ड मैरिज तब की जाये

जब एक दूसरे को समझने लगें पार्टनर्स

चैटिंग से , मीटिंग से और मोबाइल पर लम्बी लम्बी बातों से

मतलब शादी हो तब , जब हो जाये  लव !

Friday, 4 May 2012

खण्ड खण्ड मत करो इसे घर तो यह मेरा है !

खण्ड खण्ड मत करो इसे घर तो यह मेरा है ! माननीय सुप्रिम कोर्ट ने उ. प्र. में बिना वास्तविक सर्वे के ही , राजनैतिक हितो के लिये आदिम जनजाति तथा अनुसूचित जनजाति के सरकारी कर्मचारियो को विभागीय पदोन्नति में निरंतर आरक्षण का लाभ देने के सरकारी फैसले को गलत निरूपित किया है . माननीय न्यायालय के फैसले को निष्प्रभावी करने के लिये संसद में कानून लाने की राजनैतिक चर्चा सरगर्मी पर है .देश की यह स्थिति बहुत खेदजनक है . जब संविधान बनाया गया था तब क्या इसी तरह के आरक्षण की कल्पना की गई थी ? क्या स्वयं बाबा साहब अंबेडकर यह नही चाहते थे कि दलित वर्ग के भारतीय नागरिक भी बराबरी से देश की मूल धारा में शामिल हों ? क्या ६५ सालो से लगातार आरक्षण के मुद्दे का राजनैतिक उपयोग नही हो रहा है ? क्या जातिगत आरक्षण के आधार पर आवश्यकता से अधिक ऊपर उठे हुये दलित वर्ग को आज समाज में बेवजह हीन भावना का शिकार नही बनना पड़ता ! क्या इस तरह के एक्सलेरेटेड प्रमोशन के चलते सारे सरकारी विभागो के शीर्ष पदो पर कम दक्ष लोगो का बोलबाला नही हो गया है ? जिसके चलते सही निर्णयो की जगह राजनैतिक , व्यक्तिगत हितो वाले निर्णय नहीं हो रहे हैं ? इस सारी प्रक्रिया से देश क्या सवर्णो के प्रतिभावान व्यक्तियो को कुंठित नही कर रहा है ? क्या हम इस व्यवस्था से एक नये वर्ग संघर्ष को जन्म नही दे रहे हैं ? ऐसे ढ़ेर से सवाल हर बुद्धिजीवी के मन में कौंध रहे हैं . पर ये सारे प्रश्न , अनुत्तरित हैं ! किसी नेता में यह साहस नही है कि वह सत्य को सही तरीके से प्रस्तुत कर जनता को विश्वास में लेकर देश को घुटन से बचावे . जो संगठन आरक्षण के विरोध में सामने आ रहे हैं वे केवल प्रतिक्रिया में उपजते हैं , उनके भी अपने निहित स्वार्थ मात्र हैं . किसी को उस आदर्श की रत्ती भर भी चिंता नही है जो संविधान की मूल भावना है . संविधान देश के प्रत्येक नागरिक को जाति , धर्म , वर्ग , क्षेत्रीयता से हटकर बराबरी का दर्जा देता है , पर जिस तरह का शासन देश में चल रहा है , क्या उसके चलते आज से सौ बरस बाद भी ऐसी आदर्श बराबरी की कल्पना हम आप कर सकते हैं ? क्षुद्र स्वार्थो के चलते राज्य विखण्डित किये जा रहे हैं , सरकारी तंत्र में नये नये विभाग , निगम , मण्डल और कंपनियां बनाकर अपने लोग बैठाये जा रहे हैं ! उपर से तुर्रा यह है कि राजनेता ऐसी हर विखण्डन की कार्यवाही को विकास से जोड़कर जनहित में बताते हैं , और हम सब मौन सुनने को बाध्य हैं . लोकतंत्र के नाम पर सरकारें बनाने , सरकारें चलाने के लिये छोटे छोटे दल राजनैतिक सौदेबाजी , निगोशियेशन , पैकेज डील को सही निरूपित कर रहे हैं ! यदि कोई बाबा रामदेव या केजरीवाल की तरह संसद में बैठे लोगो के विरुद्ध कोई अंगुली भी उठाता है तो ये ही लोकतंत्र के पुजारी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार को तिलांजली देकर उसके विरुद्ध हर संभव जांच प्ररंभ करने को भी सही सिद्ध करने से बाज नही आते . मैं केवल एक तटस्थ शुद्ध भारतीय नागरिक की हैसियत से सोचने की अपील करना चाहता हूं , जब आप यह भूलकर कि आप किस जाति , संप्रदाय या पार्टी के हैं , विशाल हृदय और सार्वभौमिक दृष्टि से सोचकर नैसर्गिक न्याय के सिद्धांत पर मनन करेंगे तो आप भी वही निर्णय लेंगे जिसकी झलक सर्वोच्च न्यायालय के इस फैसले में ध्वनित होती है . यह सही है कि न्यायालयीन फैसला संवैधानिक और नियमो की धाराओ , उपधाराओ में बंधा हो सकता है , पर एक कानून न जानने वाला मेरे जैसा साधारण देश प्रेमी नागरिक यही कहेगा कि आरक्षण से खण्ड खण्ड मत करो इसे , घर तो यह मेरा है ! विवेक रंजन श्रीवास्तव

Thursday, 29 March 2012

कुछ भी कहो बाइक वाले लड़के होते स्मार्ट हैं !!

हाय ! कुछ भी कहो बाइक वाले लड़के होते स्मार्ट हैं !!
विवेक रंजन श्रीवास्तव
९४२५८०६२५२
ओ बी ११ , विद्युत मण्डल कालोनी , जबलपुर
बात उन दिनो की है जब मैं भोपाल में एमएसीटी में इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहा था ,कालेज की उम्र का तकाजा था कि लड़कियो के कमेंट भीड़ में भी बहुत साफ सुनाई पड़ते थे . एमएसीटी की पहाड़ी से नीचे उतरकर हम प्रायः शाम को न्यूमार्केट में टाइमपास करते थे . मुझे आज भी वह आवाज और वह सुंदर चेहरा याद है , मैं अपने मित्र के साथ बाइक पर तेज रफ्तार से निकला , लड़कियो का एक ग्रुप भी पैदल जा रहा था , पीछे से एक लड़की की आवाज आई ..".हाय ! कुछ भी कहो बाइक वाले लड़के होते स्मार्ट हैं !!" मैने पलट कर देखा वे हमारे ही विषय में बातें कर रही थी , और एक सुंदर लड़की का कमेंट था यह .
दूसरी घटना अभी २५ बरस बाद की है . सनडे का दिन था , हम मजे में लंच ले कर उठे ही थे कि मोबाइल बजा . रिलांयस वर्ल्ड एक्जाम सेंटर से फोन था , मेरे बेटे का कम्प्यूटर ओलमंपियाड का एक्जाम था , हमें बिल्कुल याद नही थी . एक्जाम सेंटर से फोन आया कि रिपोर्टिंग टाइम हो चुका है ! अभी तक मेरा बेटा "अमिताभ" वहाँ पहुंचा क्यो नही है ? हम शाक्ड थे ! मैंने तुरंत बाईक निकाली , बेटा जैसे कपड़ो में था उसे वैसे ही बैठाकर निकल पड़ा , सिग्नल की परवाह नही , बेटे को ढ़ाड़स भी बधाता जा रहा था , आंखे सड़क पर २०० मीटर आगे देख रही थी ...शायद मैने अब तक की सबसे तेज ड्राइविंग की उस दिन , कालेज वाले दिनो से भी तेज ! लगभग ५ मिनट बाद ही हम , घर से कोई ५ किमी दूर एक्जाम सेंटर पर थे , जो बीच बाजार , जबलपुर की माडल रोड पर है . बेटा परीक्षा में भीतर गया , तो रिसेप्शनिस्ट ने मुस्कराते हुये उससे कहा "बाइक वाले लड़के होते स्मार्ट हैं !!" ..मुझे एकदम से अपने कालेज के दिनो वाली घटना याद हो आयी .
बाद में जब रिजल्ट आया तो बेटे ने उस ओलंपियाड में प्रदेश में टाप भी किया .

Friday, 23 March 2012

समय ही इनके प्रयासो का मूल्यांकन करेगा

हिन्दी ब्लागिंग के विगत वर्ष ....

पारिवारिक साहित्यिक संस्कारो के चलते लिखना छपना तो स्कूल के दिनो से ही प्रारंभ हो गया था , २००५ में हिन्दी ब्लागिंग प्रारंभ कीhttp://vivekkenamaskar.blogspot.in/ और दुनिया से सीधे जुड़ गया . मजा आता था ,न ही संपादक जी की कैंची चल पाती थी, न तो छपने के लिये इंतजार करना होता था , और संपादक के खेद सहित वापसी के लिफाफे का तो डर ही नही था .

ब्लाग विथ ए मिशन http://nomorepowertheft.blogspot.com/ भी चल रहा है .
ब्लाग एग्रीगेटर , ब्लागवाणी , नारद जी के सौजन्य से घण्टे दो घण्टो में ढ़ेर सी प्रतिक्रियायें भी आ जाती थीं .

फिर मैने वेब दुनिया पर भी ब्लागिंग की http://duniyagolhai.mywebdunia.com/

. ग्रुप ब्लागो में भी लिखा , कई कई जगह http://bhadas.blogspot.in/
.
मित्रो के साथ मिलकर दिव्य नर्मदा http://divyanarmada.blogspot.in/जैसी साहित्यिक पत्रिका भी ब्लाग पर बना डाली .

पर इन दिनो जो मजा जागरण जंक्शन पर आ रहा है वह नयापन लिये हुये है . कमी बस इतनी है कि अब तक ब्लाग लेखन पर पारिश्रमिक की कोई व्यवस्था नही है , मतलब जो घर बेचे आपनो चले हमारे साथ ....
हमारे जैसे सैकड़ो धुनी इस हिन्दी सेवा में लगे ही हैं . समय ही इनके प्रयासो का मूल्यांकन करेगा .

Saturday, 12 November 2011

प्रसन्नता होगी यदि इस लिंक का विस्तार आपके वेब पन्ने पर भी करेंगे

श्रीमद्भगवत गीता विश्व का अप्रतिम ग्रंथ है !
धार्मिक भावना के साथ साथ दिशा दर्शन हेतु सदैव पठनीय है !
जीवन दर्शन का मैनेजमेंट सिखाती है ! पर संस्कृत में है !
हममें से कितने ही हैं जो गीता पढ़ना समझना तो चाहते हैं पर संस्कृत नहीं जानते !
मेरे ८४ वर्षीय पूज्य पिता प्रो सी बी श्रीवास्तव विदग्ध जी संस्कृत व हिन्दी के विद्वान तो हैं ही , बहुत ही अच्छे कवि भी हैं , उन्होने महाकवि कालिदास कृत मेघदूत तथा रघुवंश के श्लोकशः हिन्दी पद्यानुवाद किये , वे अनुवाद बहुत सराहे गये हैं . हाल ही उन्होने श्रीमद्भगवत गीता का भी श्लोकशः पद्यानुवाद पूर्ण किया . जिसे वे भगवान की कृपा ही मानते हैं .
उनका यह महान कार्य http://vikasprakashan.blogspot.com/ पर सुलभ है . रसास्वादन करें . व अपने अभिमत से सूचित करें . कृति को पुस्तकाकार प्रकाशित करवाना चाहता हूं जिससे इस पद्यानुवाद का हिन्दी जानने वाले किन्तु संस्कृत न समझने वाले पाठक अधिकतम सदुपयोग कर सकें . नई पीढ़ी तक गीता उसी काव्यगत व भावगत आनन्द के साथ पहुंच सके .
प्रसन्नता होगी यदि इस लिंक का विस्तार आपके वेब पन्ने पर भी करेंगे . यदि कोई प्रकाशक जो कृति को छापना चाहें , इसे देखें तो संपर्क करें ..०९४२५८०६२५२, विवेक रंजन श्रीवास्तव