नाटक
स्थिति नियंत्रण में है !
देश की कानून व्यवस्था पर व्यंग , डी पी एस लखनऊ के कल्चरल सैल के आग्रह पर विशेष रूप से लिखित
लेखक
विवेक रंजन श्रीवास्तव विनम्र
A १ , विद्युत मण्डल कालोनी , रामपुर , जबलपुर
०९४२५८०६२५२
कलाकारः
1. आम आदमी (सूत्रधार) सामान्य कपड़ो में
२ आम महिला साड़ी में
३ इंस्पैक्टर खाकी वर्दी में
४ एक युवा लड़की भड़कीली पोशाक में
८ गले में रंगीन रूमाल डाले हुये गली के शोहदे २ लड़के
५ अखबार का लिबास पहने हुये ..अखबार के रूप में एक लड़का
६ टी वी चैनल का पत्रकार ..हाथो में माइक लिये हुये
७ आतंकवादी की सूरत में एक लड़का
८ भीड़ से दो लड़के
सामग्री
1. एक स्कूल का घंटा
2 एक बैग में बम
३ एक स्टूल
स्थलः सडक के किनारे कोई चैराहे का नुक्कड
सूत्रधार आम आदमी … घंटा बजाते हुये ….टन टन टन ….. लो हो गई अदालतो की गर्मी की छुट्टियां ! सुप्रिम कोर्ट में ६० हजार प्रकरण लंबित हैं ! ४४ लाख प्रकरण देश के विभिन्न हाई कोर्टो में और लगभग तीन करोड़ प्रकरण निचली अदालतो में पेंडिंग हैं . और हो गई अदालतो की महीने भर की छुट्टियां ! अब जज साहबान गर्मी मनाने बच्चो बीबी के साथ पहाड़ों पर जायेंगे !
आम महिला ……… .अंग्रेजो की गुलामी के दिनो की याद है ? तब एसी , कूलर बिजली के पंखे नही होते थे … तब गर्मियो में पूरी राजधानी ही पहाड़ो पर शिफ्ट कर दी जाती थी … क्योकि अंग्रेजो को गरमी बर्दाश्त नहीं होती थी . गर्मियो की छुट्टियां अंग्रेजो की ही देन है जिसे अदालतें आज भी ज्यो का त्यों ढ़ो रही हैं , ठीक वैसे ही जैसे अदालतो की अंग्रेजी और खास गैर हिन्दी भाषा .
सूत्रधार आम आदमी .. अरे कोई तो बता दो इन जज साहब को कि जस्टिस डिलेयेड इज जस्टिस डिनायड . अब कब तक कानून आंखो पर पट्टी बांधे अंधा बना रहेगा ? कब तक न्याय पेशी दर पेशी बरसों पकता रहेगा जैसे बीरबल की खिचड़ी ! देश के राष्ट्रीय ला संस्थानो से पाँच साला एल एल बी कोर्स के पढ़े लिखे होनहार युवाओ में संभावना की कौंध नजर आती है , पर वे भी कारपोरेट जगत की हाई पैकेज वाली चकाचौंध से प्रभावित हैं और उन्हें इस चमक से बचाने के कोई प्रयास भी नही हो रहे . यहाँ आज न्याय की रक्षा करने वाले बैरिस्टर कम और कानून के लूप होल में से मल्टी नेशनल्स के लिये मोटी रकम निकालने वाले कारपोरेट ला विशेषज्ञ अधिक बन रहे हैं .
अदालतो में आज भी वही ईवनिंग क्लासेज से ला किये हुये वकील ही काम कर रहे हैं , हर पेशी में मिलने वाली फीस में फैसले से ज्यादा रुचि होना उनकी परिस्थितियो की मजबूरी है .
इंस्पैक्टर ….. क्या हो हल्ला मचा रखा है ..अदालतें बंद हैं महीने भर को , तो क्या है ..तुम्हें पता नही है क्या कि जस्टिस हरीड इज जस्टिस बरीड ! और श्रीमान आम आदमी तुम्हें क्या , जवान उठाई और पटक दी , लगे सरकार को कोसने ! तुम इतना तक नही जानते कि न्याय की देवी ने आंखो पर पट्टी इसलिये नहीं बांधी है कि कानून अंधा है , बल्कि इसलिये बांधी है क्यो कि कानून के लिये सब बराबर हैं ! कानून सबूत मागता है , वह तुम्हारी तरह भावनाओ से बहकता नही है ..सबूत ढ़ूंढ़ने के लिये पुलिस है , प्रशासन है , सबूत पेश करने के लिये काले कोट में वकील हें … .अदालतें कम हैं तो क्या हुआ …केस ज्यादा हैं तो क्या हुआ …सब ठीक ठाक ही है … स्थिति नियंत्रण में है !
इंस्पैक्टर बैठ जाता है .
युवा लड़की भड़कीली पोशाक में इतराते हुये …कुछ किताबें लिये हुये , मोबाइल पर बात करते प्रवेश करती है .
गले में रंगीन रूमाल डाले हुये गली के शोहदे लड़के उसे छेड़ते हुये …ओय होय !! ………. चलती क्या खंडाला !
लड़की …. सैंडिल उतारकर लड़को की ओर मुखातिब होकर …. मैं आजाद देश की प्रगतिशील लड़की हूं ! लड़को से हर दौड़ में एक कदम आगे , मुझे छेड़ते हो !
इंस्पैक्टर ….दौड़कर लड़की का हाथ पकड़कर ..हाथ ऊंचे उठाते हुये…… कानून महिलाओ के साथ है .
सूत्रधार आम आदमी…. देश प्रगति कर रहा है , पश्चिमी देशो की बराबरी कर रहा है नारी की पूजा अब पिछड़ेपन की बातें हैं . अब हमने पत्रिका के पन्नो पर नारी देह को विज्ञापनो में परोसने में प्रगति के सूत्र ढ़ूढ़ निकालें है . मुन्नी बदनाम हुई और शीला की जवानी जैसे फिल्मी गीतो ने राष्ट्रीय लोकप्रियता के रिकार्ड बनाये हैं , सेंसर से स्वीकृत ऐसी फिल्मो को हम ही बाक्स आफिस पर हिट कर रहे हैं .समाज ने ऐसी व्यवस्था को स्वीकार कर लिया है कि एक क्लिक पर चंद रुपयो के लिये स्त्री स्वयं सारे बंधनो से मुक्त हो रही है .
आम महिला ………हर बरस देश में लगभग २० से २५ हजार … बलात्कार के प्रकरण पुलिस रिकार्ड में दर्ज हो रहे हैं , और पुलिस के बड़े बूढ़ो का कहना है कि इससे कहीं ज्यादा घटनायें आन रिकार्ड आती ही नही है ….. देश की राजधानी तक में लड़कियो के साथ तरह तरह से बत्ततमीजियां हो रही हैं . तंदूर में जिंदा जला दी गई लड़कियां . लड़कियो के शरीर के टुकड़े टुकड़े करके सूटकेस में भरकर फेका तक है दंरदियो ने . ८ साल से ६० साल तक की स्त्री ही नही , नन्ही सी बच्ची भी सैक्स वृत्ति जनित अपराधो से बच नही पा रही ! ळड़कियो की खरीद फरोख्त हो रही है ..कैसे हब्शी युग में जा पहुंचे हैं हम ? पुलिस थानो में भी महिलायें असुरक्षित हैं .
इंस्पैक्टर … लेकिन जनता बिलकुल कनफ्यूज न हो ..महिला थाने बनाये गये हैं . निर्भया फंड आबंटित हो चुका है . दामिनी की कुर्बानी बेकार नही गई है . जनता जाग गई है , …धीरे से…. अब हम सो सकते हैं .. सारी जस्ट फार जोक ! स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है ! और इसका प्रमाण भी है .. लाखो लड़कियां अपने घरो से दूर उच्च शिक्षा ले रही हैं , नौकरियां कर रही हैं , रोज बसों , मैट्रो में ट्रेवल कर रही हैं . रात की पारी में दफ्तरो कारखानो में पुरुषो के कंधो से कंधे मिलाकर काम कर रहीं हैं , देश की प्रगति में अपना योगदान दे रहीं हैं . है ना स्थिति नियंत्रण में !
इंस्पैक्टर बैठ जाता है .
अखबार का लिबास पहने हुये ..अखबार के रूप में एक लड़का गोल घुमता हुआ भीड़ के बीच से केंद्र में प्रवेश करता है …. आज की ताजा खबर ! साइबर क्राइम ब्रांच ने पकड़ा मंत्री जी के विरुद्ध टिप्पणी करने वालो को ! सोशल मीडिया पर सरकार की होगी नजर ….
सूत्रधार आम आदमी…. फेसबुक पर की गई एक बौद्धिक टिप्पणी या एक कार्टून तो मंत्री जी को नागवार गुजरते हैं और इस साइबर क्राइम को रोकने सारा तंत्र सक्रिय हो जाता है , पर सरकार उस दहशत गर्द को कभी नही पकड़ पाती जिसकी फैलाई अफवाहो से दक्षिण भारत से सारे पूर्वोत्तर राज्यो के कामकाजी लोगो को बेवजह पलायन करना पड़ा और सरकार के नुमांइदो को बयान देना पड़ा था कि स्थिति नियंत्रण में है !
आम महिला …… अभिव्यक्ति का अधिकार हमारा मौलिक संवैधानिक अधिकार है . सोशल मीडिया पर यह सरकारी पहरेदारी कितनी सही कितनी गलत है ? कोई बतायेगा ! अगली बार फिर से कम्प्यूटर के जरिये कोई अफवाह कोई दहशत कोई आतंक न फैले ,आतंकवादियो को मदद न मिले इंटरनेट से . ई मनी के इस समय में देश की अर्थ व्यवस्था ही जाम न हो जावे हैकिंग से … इसके लिये जरूरी है कि इंटरनेट पर नियंत्रण हो , ई मेल एड्रेस का पंजीकरण लागू किया जावे .
सूत्रधार आम आदमी…. इंटरनेट ने देश से भ्रष्टाचार मिटाने में और कानून व्यवस्था लागू करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है . चाहे रेल रिजर्वेशन हो , सरकारी योजनाओ के अनुदान हों , बिलों के भुगतान हों हमें जहां इस आधुनिक संसाधन का व्यापक जनहित में बेहतर इस्तेमाल सुनिश्चित करना होगा वहीं यह भी देखना होगा कि दूषित सामग्री वाली पोर्न साइट्स हमारी नई पीढ़ी को दिग्भ्रमित न कर सकें .
इंस्पेक्टर … जनता की ओर मुखातिब होकर …अरे साहबान आप इन बेचारे सूत्रधार को केवल नुक्कड़ नाटक का सूत्र ही संभालने दें . आप जरा भी चिंतित न हों . इस देश की कानून व्यवस्था को संभालने के लिये इस देश में अब भी पुलिस है ! मैं हूं ! बड़े बड़े आई पी एस , आई ए एस अफसर हैं …लाल बत्तियो की गाड़ियो पर सवार बड़े बड़े मंत्री हैं ! स्थिति नियंत्रण में हैं !
इंस्पैक्टर बैठ जाता है .
टी वी चैनल का पत्रकार ..हाथो में माइक लिये हुये प्रवेश करता है . ब्रेकिंग न्यूज ! नक्सलवादियो ने फिर किया बारूदी सुरंगो का विस्फोट . परिवर्तन यात्रा पर बड़ा हमला . कई घायल .
सूत्रधार आम आदमी …महात्मा गांधी को देश के नेताओं ने आजादी के बाद अपने-अपने ढंग से उपयोग किया है . उनकी सफेद खादी राजनेताओ की यूनीफार्म बन गई है , जिसे पहनकर वे हर संभव काले कारनामे कर रहे हैं . कोई गांधी की लाठी ले भागा है और उसे भांजकर छल बल से वोट बटोर रहा है . कोई उनके राम के नाम को भुना कर वोटो में तब्दील कर रहा है . शपथ लेने ,अनशन करने और विदेशी अतिथियो को घुमाने के लिये गांधी को राष्ट्रपिता बनाकर उनकी एक संगमरमरी समाधि बना दी गई है . गांधीवाद दम तोड़ चुका है . जहां हमारी सीमायें विदेशी आतंक से बुरी तरह प्रभावित हैं वहीं देश के भीतरी हिस्सो में भी आतंकवादी जब तब कानून व्यवस्था एजेंसियो के तालमेल में अभाव के चलते छोटी बड़ी वारदातें करने में सफल हो रहे हैं . सीरियल बम विस्फोट की कई घटनायें देश के कई शहरो में घट चुकी हैं . देश की आजादी का जश्न हो या गणतंत्र दिवस का भव्य आयोजन हर बार जैसे सुरक्षा बलो की अग्नि परीक्षा होती दिखती है .
आम महिला … विदेशी आतंक के साथ ही आंतरिक आतंक नक्सलवाद की शक्ल में अपनी जड़ें जमा चुका है . राज्यो की सीमावर्ती क्षेत्रो में , आदिवासी बहुल इलाकों में नक्सल गतिविधियां चरम पर हैं . प्रत्येक घटना के ठीक बाद मंत्री जी के शांति बनाये रखने के खोखले बयान , जाँच करके वास्तविक दोषी को सजा दिलाये जाने के आश्वासन आम नागरिको के लिये विश्वसनीय नही रह गये हैं . मानवाधिकार संगठनों के आंदोलन , राजनैतिक पार्टयो के बंद , इन सब से आम नागरिक ऊब चुका है .
इंस्पेक्टर … टी वी के हर बुलेटिन में इन कड़वे सच को ब्रेकिंग न्यूज के रूप में देखकर भी , हर सुबह अखबार की सुर्खियो में देश के ऐसे बदसूरत हालात चाय की घूंट के साथ पीते हुये भी , जनता एक सुखद भविष्य की कामना में चार लगभग समान राजनैतिक ठग चेहरो में से किसी एक को वोट देकर चुनती ही है . लोकतंत्र कायम है और दुनिया के दूसरे देशो से कही बेहतर है . स्थिति नियंत्रण में है . हर घटना हमें एक शिक्षा देती है , बेहतर समन्वय से , बेहतर व्यवस्था से देश का प्रशासन हर नागरिक को पूरी सुरक्षा देने को प्रतिबद्ध है .
तभी भीड़ के एक हिस्से में हलचल मचती है , और भीड़ से दो युवक एक आतंकवादी को पकड़ कर केंद्र में लाते हैं . इंस्पेक्टर साहब संभालिये इसे यह संदिग्ध आदमी यहां यह बैग छोड़कर भाग रहा था . इंस्पेक्टर बैग खोलकर देखता है और बम निकालता है .
इंस्पेक्टर … आतंकवादी को कालर से पकड़कर , अच्छा तो तुम यहां बम विस्फोट करना चाहते थे . पर मेरे देश के नौजवानो ने कर दी ना तुम्हारी कोशिश नाकाम .शाबास नौजवानो !
सभी कलाकार हाथ जोड़कर मानव श्रंखला बनाकर आतंकवादी को गोल घेरे में ले लेते हैं .
इंस्पेक्टर …स्टूल पर खड़े होकर
दोस्तो ! अकेली सरकार कुछ नही कर सकती . हम सब को ऐसे ही चौकस रहना होगा . जब तक हम सतर्क हैं और अपने अपने परिवेश , अपने घर के आस पास , सार्वजनिक स्थलो पर चौकन्ने हैं तब तक
कोई भी अपराधी सफल नही हो सकता . इस देश की सवा अरब की आबादी ही हमारी सबसे बड़ी शक्ति है . क्लोज सर्किट कैमरो की निगरानी , ढ़ेर सी पुलिस से बढ़कर है हमारी परस्पर संवेदना , जागरुखता , सामयिक , तात्कालिक बुद्धि से उठाया गया छोटा सा कदम . प्रायः भगदड़ से होने वाली दुर्घटनाओ का मूल कारण किसी एक व्यक्ति द्वारा नियमो को तोड़कर जल्दबाजी मचाना होता है . जरूरी है कि भीड़ में हम सब संयम से काम लें कतार में कार्य करें . कानून आपके साथ है , पर आपको भी कानून का साथ देना होगा . उठाईगिर , पिक पाकेट या यौन अपराधी तक समाज की सतर्कता से कभी भी उसके मकसद में कामयाब नही हो सकता . सड़क दुर्घटना में पीड़ित के प्रति हमारी संवेदनशील त्वरित कार्यवाही उसकी जान बचा सकती है . आइये संकल्प करें कि केवल सरकारी तंत्र को दोष देने के बजाय हम अपनी सोच बदलेंगें और घर बाहर अपने कान , नाक , आंखे खुली रखकर पुलिस की हर संभव सहायता करेंगे . क्योकि बढ़ती आबादी के दबाव में हमारे इसी प्रयास से रहेगी स्थिति नियंत्रण में .
.................................................................................................................................................
vivek ranjan shrivastava
आत्म कथ्य
ये दुनिया एक रंगमंच है . हम सब छोटे बड़े कलाकार और परमात्मा शायद सबका निर्देशक है जिसके इशारो पर हम उठते गिरते परदे और प्रकाश व ध्वनि के तेज कम होते नियंत्रण के साथ अपने अपने चरित्र को जी रहे हैं . जो कलाकार जितनी गम्भीरता से अपना किरदार निभाता है , दुनिया उसे उतने लम्बे समय तक याद रखती है .
एक लेखक की दृष्टि से सोचें तो अपनी भावनाओ को अभिव्यक्त करने की अनेक विधाओ में से नाटक एक श्रेष्ठ विधा है . कविता न्यूनतम शब्दो में अधिकतम कथ्य व्यक्त कर देती है ,किन्तु संप्रेषण तब पूर्ण होता है जब पाठक के हृदय पटल पर कविता वे दृश्य रच सकें जिन्हें कवि व्यक्त करना चाहता है . वहीं नाटक चूंकि स्वयं ही दृश्य विधा है अतः लेखक का कार्य सरल हो जाता है , फिर लेखक की अभिव्यक्ति को निर्देशक तथा नाटक के पात्रो का साथ भी मिल जाता है . किन्तु आज फिल्म और मनोरंजन के अन्य अनेक आधुनिक संसाधनो के बीच विशेष रूप से हिन्दी में नाटक कम ही लिखे जा रहे हैं . एकांकी , प्रहसन , जैसी नाट्य विधायें लोकप्रिय हुई हें . इधर रेडियो रूपक की एक नई विधा विकसित हुई है जिसमें केवल आवाज के उतार चढ़ाव से अभिनय किया जाता है . नुक्कड़ नाटक भी नाटको की एक अति लोकप्रिय विधा है . प्रदर्शन स्थल के रूप में किसी सार्वजनिक स्थल पर एक घेरा, दर्शकों और अभिनेताओं का अंतरंग संबंध और सीधे-सीधे दर्शकों की रोज़मर्रा की जिंद़गी से जुड़े कथानकों, घटनाओं और नाटकों का मंचन, यह नुक्कड़ नाटको की विशेषता है .
हिन्दी सिनेमा में अमोल पालेकर , फारूख शेख , शबाना आजमी जैसे अनेक कलाकार मूलतः नाट्य कलाकार ही रहे हैं . किन्तु नाट्य प्रस्तुतियो के लिये सुविधा संपन्न मंचो की कमी , नाटक से जुड़े कलाकारो को पर्याप्त आर्थिक सुविधायें न मिलना आदि अनेकानेक कारणो से देश में सामान्य रूप से हिन्दी नाटक आज दर्शको की कमी से जूझ रहा है . लेकिन मैं फिर भी बहुत आशान्वित हूं , क्योकि सब जगह हालात एक से नही है . जबलपुर में ही तरंग जैसा प्रेक्षागृह , विवेचना आदि नाट्य संस्थाओ के समारोहो में दर्शको से खचाखच भरा रहता है . सच कहूं तो नाटक के लिये एक वातावरण बनाने की जरूरत होती है .जबलपुर में यह वातावरण बनाया गया है . यहाँ नाटक अभिजात्य वर्ग में अति लोकप्रिय विधा है . सरकारें नाट्य संस्थाओ को अनुदान दे रहीं हैं .हर शहर में नाटक से जुड़े , उसमें रुचि रखने वाले लोगो ने संस्थायें या इप्टा अर्थात इंडियन पीपुल थियेटर एसोशियेशन जैसी १९४३ में स्थापित राष्ट्रीय संस्थाओ की क्षेत्रीय इकाइयां स्थापित की हुई हैं . और नाट्य विधा पर काम चल रहा है . वर्कशाप के माध्यम से नये बच्चो को अभिनय के प्रति प्रेरित किया जा रहा है . पश्चिम बंगाल व महाराष्ट्र में अनेक निजी व संस्थागत नाट्य गृह संचालित हैं , दिल्ली में राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय , भोपाल में भारत भवन आदि सक्रिय संस्थाये इस दिशा में अपनी भूमिका का निर्वाह कर रही हैं .नाटक के विभिन्न पहलुओ पर पाठ्यक्रम भी संचालित किये जा रहे हैं .
जरूरत है कि नाटक लेखन को और प्रोत्साहित किया जावे क्योकि आज भी जब कोई थियेटर ग्रुप कोई प्ले करना चाहता है तो उन्ही पुराने नाटको को बार बार मंचित करना पड़ता है .नाटक लेकन पर कार्यशालाओ के आयोजन किये जाने चाहिये , मेरे पास कई शालाओ के शिक्षको के फोन आते हैं कि वे विशेष अवसरो पर नाटक करवाना चाहते हैं पर उस विषय का कोई नाटक नही मिल रहा है , वे मुझसे नाटक लिखने का आग्रह करते हैं , मैं बताऊ मेरे अनेक नाटक ऐसी ही मांग पर लिखे गये हैं . मेरे नाटक पर इंटरनेट के माध्यम से ही संपर्क करके कुछ छात्रो ने फिल्मांकन भी किया है . संभावनायें अनंत हैं . आगरा में हुये एक प्रयोग का उल्लेख जरूरी है , यहां १७ करोड़ के निवेश से अशोक ओसवाल ग्रुप ने एक भव्य नाट्यशाला का निर्माण किया है , जहां पर "मोहब्बत दि ताज" नामक नाटक का हिन्दी व अंग्रेजी भाषा में भव्य शो प्रति दिन वर्षो से जारी है , जो पर्यटको को लुभा रहा है . अर्थात नाटको के विकास के लिये सब कुछ सरकार पर ही नही छोड़ना चाहिये समाज सामने आवे तो नाटक न केवल स्वयं संपन्न विधा बन सकता है वरन वह लोगो के मनोरंजन , आजीविका और धनोपार्जन का साधन भी बन सकता है .
परिचय
......... विवेक रंजन श्रीवास्तव विनम्र
मूलतः व्यवसाय से इंजीनियर पर गंभीर व्यंगकार , हिन्दी में नाटक ,कविता , तकनीकी लेखन , वैचारिक लेख हेतु जाना पहचाना देश व्यापी नाम .
२००५ से हिन्दी ब्लाग में सतत सक्रिय
जन्म २८.०७.१९५९ , मंडला म.प्र.
शिक्षा बी ई सिविल एन आई टी रायपुर से
पोस्ट ग्रेजुयेशन फाउंडेशन इंजीनियरिंग एम ए सी टी भोपाल से
इंदिरा गांधी ओपन युनिवर्सिटी दिल्ली के चार्टर बैच से मैनेजमेंट में उपाधि
मैनेजर ब्यूरो आफ इनर्जी एफिशियेंसी
शासकीय सेवा
पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कम्पनी जबलपुर में प्रमुख सिविल संकाय अतिरिक्त मुख्य अभियंता सिविल के रूप में सेवारत
विभिन्न पदो पर कार्य करते हुये अनेक महत्वपूर्ण योजनाओ को मूर्त रूप दिया
निर्माणाधीन परमाणु बिजलीघर चुटका जिला मण्डला की प्रजेक्ट रिपोर्ट तैयार करने , निर्मित हो चुकी व सफलता पुर्वक वर्षो से चल रही लघु पन बिजली परियोजना भीमगढ़ , चरगांव आदि की प्रोजेक्ट रिपोर्ट व हाईड्रोलाजी तैयार करने के महत्वपूर्ण कार्य
कंपनी के जन संपर्क अधिकारी के रूप में सफलता पूर्वक कार्य निर्वहन
कंपनी की गृह पत्रिका विद्युत ब्रह्मेति का संपादन
देश की पहली ब्लागजीन ब्लागर्स पार्क का संपादन
प्रकाशित किताबें , ई मीडिया पर भी डेली हंट मोबाईल एप सहित पुस्तकें सुलभ
रामभरोसे व्यंग संग्रह
मेरे प्रिय व्यंग लेख
कौआ कान ले गया व्यंग संग्रह
धन्नो बसंती और बसंत व्यंग संग्रह
हिंदोस्ता हमारा नाटक संग्रह
जादू शिक्षा का नाटक
जल जंगल और जमीन
बिजली का बदलता परिदृश्य
आकाशवाणी व दूरदर्शन से अनेक प्रसारण , रेडियो रूपक लेखन .
उपलब्धियाँ
हिंदोस्तां हमारा नाटक संग्रह को ३१००० रु का साहित्य अकादमी हरिकृष्ण प्रेमी पुरस्कार
रेड एण्ड व्हाइट १५००० रु का राष्टीय पुरुस्कार सामाजिक लेखन हेतु
रामभरोसे व्यंग संग्रह को राष्टीय पुरुस्कार दिव्य अलंकरण
कौआ कान ले गया व्यंग संग्रह को कैलाश गौतम राष्ट्रीय सम्मान
जादू शिक्षा का नाटक को ५००० रु कासेठ गोविंद दास कादम्बरी राष्ट्रीय सम्मान
म. प्र. शासन का ५००० रु का प्रतियोगिता में प्रथम पुरस्कार जादू शिक्षा का नाटक को
खटीमा उत्तरांचल स्थित बाल कल्याण संस्थान द्वारा विशेष रूप से बाल रचना हेतु सम्मानित
सुरभि टीवी सीरियल में मण्डला के जीवाश्मो पर फिल्म का प्रसारण , युवा फिल्मकार सम्मान
वर्तिका पंजीकृत संस्था के प्रांतीय अध्यक्ष ,
प्रणाम मध्यप्रदेश के आंचलिक संयोजक
साहित्य अकादमी के पाठक मंच संयोजक के रूप में निरन्तर साहित्य सेवा
ब्लागिंग २००५ से हिन्दी ब्लागिंग http://vivekkevyang.blogspot.com http://nomorepowertheft.blogspot.com व अन्य ब्लाग
ईमेल vivekranjan.vinamra@gmail.com
संपर्क बंगला नम्बर ऐ १ , विद्युत मंडल
कालोनी , रामपुर , जबलपुर
मोबाइल ०९४२५८०६२५२ , ७०००३७५७९८
No comments:
Post a Comment