Sunday, 1 February 2026

प्रहसन "किचन में छुट्टी"

 झलकी 2


 श्रव्य प्रहसन

"किचन में छुट्टी"

विवेक रंजन श्रीवास्तव

भोपाल


अवधि: लगभग 15 मिनट

शब्द संख्या: लगभग 2200



पात्र:श्रीमती सरोजा मिश्रा (मम्मी) – 50 वर्षीया गृहिणी

हरिशंकर मिश्रा (पापा) – 55 वर्षीय, कॉलेज प्राध्यापक,

गुड्डी – 22 वर्षीया बेटी, करियर ओरिएंटेड, किचन के नाम पर रील्स

बिट्टू – 17 वर्षीय बेटा, हमेशा भूखा, पर मेहनत से दुश्मनी

बुआ जी (फोन पर)

पड़ोसन और सखी, 'संगठन शक्ति' का आधार

वॉयसओवर एंकर – रेडियो टच के लिए व्यंग्यात्मक इंटरल्यूड


दृश्य 1: "घोषणा बम"

 सुबह 7:00 बजे, डाइनिंग हॉल में

पृष्ठभूमि: हल्की हलचल, कुकर की सीटी, बर्तनों की खनक


वॉयसओवर: "रविवार की सुबह है। शहर सुस्त है। लेकिन मिश्रा निवास में माहौल गर्म है – वो भी विचारों से!"


सरोजा (थकी हुई आवाज़ में): बस बहुत हुआ! 25 साल हो गए रोटी पराठे बनाते… चाय उबालते… सबके मुँह के स्वाद ने मेरी नींद, आराम , शांति सब छीन रखी है ! बच्चों को स्कूल से छुट्टी मिलती है , आप को तो हर त्यौहार , हर शनिवार , हर रविवार आफिस जाना ही नही होता । १३ कैज्युल लीव और साल में महीने भर की अर्न लीव अलग से मिलतीं हैं । यहां तक की काम वाली की भी जब मर्जी हो छुट्टी ले बैठती है । एक मैं ही हूं जिसे मरने तक की फुर्सत नहीं है ।


गुड्डी (मोबाइल पर सर्फिंग करते हुए): यार मम्मी! ज़रा धीरे बोलो ना! कितनी बढ़िया रील देख रही हूं मैं !


बिट्टू ( चिल्लाते हुए): मम्मी! क्या बनाया आज? आलू का पराठा? डबल चीज़?


सरोजा: नहीं बेटा। आज तुम्हारी मम्मी छुट्टी पर हैं। आज से ‘स्व-निर्भर किचन परिवार योजना’ लागू हो गई है!


हरिशंकर (अखबार से झांकते हुए): क्या मतलब? खाना नहीं बनेगा?


सरोजा (संजीदगी से): हां , मैंने फैसला लिया है , रसोई से ब्रेक! आखिर मुझे भी मेरा मी टाइम लेने का हक है ! आज से आप सब अपने-अपने भोजन के लिये स्वयं जिम्मेदार बनिये । मैं आज ‘खाना नहीं बना रही’।


फोन की घंटी (बुआ जी की आवाज़ – फोन पर): "अरी सरोजा! हड़ताल कर दी या नहीं ? महिला मंडल किटी वाले सबने ने सुबह से किचन बंद किया हुआ है। आज मर्दों की परीक्षा है!"


सरोजा: बुआ, मैं तो सालों से स्टैंडबाय पर थी। आज से ‘वर्किंग मोड’ बंद!


पृष्ठभूमि संगीत – “क्रांति की धुन”


हल्के स्वर में हरिशंकर (हँसते हुए): अच्छा तो यह तुम्हारी किटी पार्टी की मुहिम है .... अरे इतना भी मत बढ़ाओ बात को। देखो, खाना बनाना कोई रॉकेट साइंस नहीं है! आज छुट्टी है ही मैं बनाता हूं तुम्हारे लिये भी और सबके लिये ..आलू के पराठे । चलो गुड्डी मेरी मदद के लिये किचन में आ जाओ ।


गुड्डी ( उत्साहित होकर ): ओह तो मुझे रील अधूरी छोड़नी पडेगी , कोई बात नहीं पर पापा मैं खुद के लिये एकदम इंस्टा स्टाइल ओट्स चीला बनाऊँगी!


बिट्टू (कंफ्यूज़ होकर ): मतलब आज हमारी मर्जी का खाना है । ओके मैं… मैं… शायद मैगी… नहीं नहीं , दीदी मेरे लिये तो पिज़्ज़ा आर्डर कर दो ।


रोल ओवर साउंड ....


पृष्ठभूमि: हल्की पॉपकॉर्न जैसी सीज़लिंग, बर्तन टकराने की आवाज़, बीच-बीच में “ओह नो!” “अरे रे!” हाथ बचा कर जल जाओगे ...


वॉयसओवर: "किचन आज रणक्षेत्र है। चाय की केतली तीर बन गई है, चम्मच ढाल, और आलू… वो अब बम!"


हरिशंकर (आलू छीलते हुए): इसमें क्या है! दो आलू, दो चुटकी नमक, एक तवा और थोड़ा सा आत्मविश्वास… लो पराठे की स्टफिंग रेडी !

(तवे पर पानी पड़ने से छन्न की आवाज .) ओहो .. हूँ… ये जलने की महक कैसे आ रही है ? अरे गुड्डी , तुमने गैस बंद ही नहीं की बेटा .. इतना धुआं, उफ .. खिरकी खोलो , जल्दी एक्जास्ट चलाओ , अरे चिमनी का स्विच कौन सा है भाई । खाँसी ...


सरोजा: ... लग गई आग ...


हरिशंकर (खाँसते हुए): ...भाग्यवान! आग नहीं लगी, सिर्फ खुद खाना बना लेने वाली हेकड़ी जल गई है ।


गुड्डी (किचन के दूसरे कोने से): ये देखो! मेरे ओट्स चीले की तस्वीर! हैश टैग शैफ गुड्डी ...

तवे से चीला निकालने की कोशिश की आवाज , अरे! ये तो निकल ही नहीं रहा , तवे पर चिपक कैसे गया । शिट ... इंस्टाग्राम में तो ऐसे पलटते हैं जैसे पंखा घुमा रहे हों!


सरोजा (दूसरे कमरे से , हंसते हुये ): रील में सब आसान लगता है, बेटा! रियलटी में ओट्स भी ऊट-पटांग हो जाते हैं!


बिट्टू (अपने स्टाइल में): पापा, दीदी! तुम लोग मस्त रहो! मैं तो बस दो मिनट वाला बेस्ट नुस्खा जानता हूँ। रुको अभी मैगी मिलती है सबको ।

गैस लाइटर जलाने की साउंड , .. अब मैं पैन में पानी, मैगी और सास डालता हूं ..


बिट्टू: बस अब दो मिनट… और फिर चलेगा मैगी का जादू ! वह व्हिशलिंग करता है ..

तभी स्मोक अलार्म बज उठता है  

बिट्टू चीखते हुये .. दीदी! स्मोक अलार्म क्यों बजा! क्या बकवास है .. मेरी मैगी काली हो गई!


गुड्डी (हँसते हुए): ये ‘काली मैगी’, ‘भूतिया भुजिया’ है!


हरिशंकर (सिर पकड़ते हुए): अब समझ आया… किचन सिर्फ रेसिपी से नहीं संभलता .. तुम्हारी मम्मी दिल से भी काम लेती है। पंद्रह मिनट में मेरे तो दोनों हाथों में जले हुए निशान बन गये हैं…


सरोजा (दर्शन भाव से): कहो फैमली .. सरोजा करती ही कया है ... दिन भर किचन में ।


रोलओवर साउंड

पृष्ठभूमि: हल्का संगीत, खाना परोसने की टन-टन


वॉयसओवर: "हर क्रांति का अंत संवाद से होता है… और रसोई क्रांति का अंत… भूख से!"


गुड्डी: मम्मी! अब मान भी जाओ! हमने सीख लिया… कि गूगल रेसिपी और रोटी में ज़मीन-आसमान का अंतर है।


बिट्टू: मम्मी, मैं अब हर संडे आपके साथ हाथ बटाकर खाना बनाना सीखूँगा… किचन केवल महिलाओ की जिम्मेदारी नहीं है , बस शुरुआत , चाय से करवा लेना।


हरिशंकर (हाथ जोड़कर): भाग्यवान! मैं तो ये भी भूल गया था कि खाना केवल पेट भरने के लिए नहीं, मन भरने के लिए भी होता है। तुम भोजन में जो प्यार परोसती हो वह अनमोल है ।

तुम्हारा हर पराठा अब से ‘प्रेरणा पराठा’ कहलाएगा!


सरोजा: चलो चलो , ज्यादा मख्खन वाली मसखरी नहीं । बताओ तो अब क्या आदेश है?


गुड्डी: कृपा करके रसोई में दोबारा प्रवेश कीजिए, मां महाराज।


बिट्टू: और खाना खिला दीजिए, वरना मैं पड़ोसियों की रोटियाँ चुरा लाउंगा!


सरोजा (हँसते हुए): अरे अभी खाना आया नहीं… आज मैंने स्विग्गी से मंगाया है!


तीनों (चकित): क्या!!


हरिशंकर .. सरोजा तुम तो बडी स्मार्ट निकलीं ,


गुड्डी .. स्मार्ट नहीं , मेरी मम्मी ओवर स्मार्ट हैं , डैशिंग हैं , फ्रेंडली हैं और बैस्ट कुक हैं । लव यू मम्मी । कभी-कभी मां को भी छुट्टी मिलनी चाहिए, जिससे वो अपनी हँसी, टीवी और शौक भी देख सके!


सभी हँसते हैं – तालियों की आवाज़


 समापन थीम वॉयस ओवर :रेडियो एंकर:

"तो श्रोताओ! ये थी हमारी खास हास्य झलकी – किचन में छुट्टी! याद रखिए मां की रसोई सिर्फ भोजन नहीं, भावनाओं का अचार है। और कभी-कभी उस अचार को भी धूप दिखा देना चाहिए!"


[समापन संगीत]

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