Sunday, 1 February 2026

"बुआ जी ऑन द ग्रुप! नाटक

 रेडियो प्रहसन

 "बुआ जी ऑन द ग्रुप!

विवेक रंजन श्रीवास्तव


अवधि: लगभग 15 मिनट शब्द संख्या: लगभग 2100

मुख्य पात्र:

बुआ जी (विमला देवी ): 60 वर्षीय

पप्पू : बुआ जी का भांजा, 35 वर्ष का IT प्रोफेशनल,

पम्मी भाभी: पप्पू की पत्नी, गृहिणी

बबलू: 10 वर्षीय चंचल बालक, जो "गूगल गुरु" है।

डैडी जी: 70 वर्षीय बुजुर्ग, जिनके लिए फोन का मतलब सिर्फ "टॉर्च" है।

रेडियो वॉयसओवर: दृश्य परिवर्तन व हास्य टिप्पणी हेतु म्युजिक।


 दृश्य 1:

 स्थान: घर का ड्राइंग रूम

समय: सुबह 8:00 बजे ,

पृष्ठभूमि: वॉट्सऐप नोटिफिकेशन की टिंग-टिंग ध्वनि लगातार


वॉयसओवर:

"सुबह की चाय और मोबाइल की स्क्रीन – दोनों गर्म हैं। और जब पारिवारिक वॉट्सऐप ग्रुप में बुआ जी का संदेश आए, तो समझिए दिन ‘सूचना विस्फोट’ से शुरू होने वाला है।


पप्पू (झुंझलाते हुए):

अरे फिर से गुड मॉर्निंग के बारह मैसेज! ये देखो – गुलाब वाला, सूरज वाला, मंदिर वाला, और ये... मोर नाचता हुआ! बुआ जी का बम फूटा है!


पम्मी भाभी:

फिर से? हंसते हुये कल तो उन्होंने लिखा था – "जिसने ये मैसेज 10 लोगों को फारवर्ड नहीं किया , उसके साथ अनर्थ हो जाएगा ।


बबलू (हँसते हुए): आज का मैसेज और भी घातक है। देखो “आज शनिवार है, जो यह मैसेज नहीं पढ़ेगा उसका मोबाइल ही हैंग हो जायेगा !”


पप्पू: मोबाइल तो हैंग नहीं हो सकता , लेकिन अब ऐसे मैसेज सहने की शक्ति जरूर हैंग हो रही है!


डैडी जी (सिर खुजाते हुए): बेटा, देखो जरा , ये मोबाइल में रोज टॉर्च अपने आप जल जाती है, फिर बुझती ही नहीं ।


मोबाईल बजता है – "बुआ जी कॉलिंग" ...


बुआ जी (मोबाईल पर ): पप्पू बेटा! ग्रुप में सब चुप क्यों हैं? मेरे शुभ प्रभात तक का कोई रिप्लाई नहीं ? कहीं कोई बीमार तो नहीं? घर में सब ठीक तो है न !


पप्पू (संभालते हुए): अरे नहीं बुआ जी, सब ठीक है… वो गुड मॉर्निंग मैसेज का थोड़ा ओवरडोज हो गया…


बुआ जी: अरे! ज्ञान बाँटना पाप है क्या? तुमने सुना नहीं है "ज्यों बांटे त्यों त्यों बढ़े , बिन खर्चे घटि जात" । मैंने कल ही टीना के फारवर्डेड मेसेज से सीखा है ... फॉरवर्डिंग इज केयरिंग!

चिढ़ते हुये ... मैं तो रोज 5 वीडियो, 3 रामायण क्लिप और 7 चेतावनी संदेश भेजूंगी। कोई मुझे रोक नहीं सकता। तुम पढ़ो न पढ़ो , वो तुमंहारी मर्जी, भेजना मेरा राइट है ।  


 [ड्रम रोल म्युजिक]


दृश्य 2:

"डिजिटल आपदा – वॉट्सऐप वॉर "

स्थान: रसोईघर

समय: दोपहर 1:00 बजे ,

बैकग्राउंड: मोबाइल की टिंग-टिंग-टिंग, साथ में कुकर की सीटी


वॉयसओवर: "एक आम दोपहर, लेकिन ग्रुप पर घमासान जारी है। बुआ जी और फैमिली के बीच वर्चुअल युद्ध का दूसरा चरण प्रारंभ!"


पम्मी (फोन दिखाते हुए): देखो जी, बुआ जी ने फिर मैसेज भेजा है – ‘ मेन गेट पर चुटकी भर हल्दी डालो, और एलियन से बचो।’

अब मैं दाल में हल्दी डालूं या बुआ जी की सलाह से ब्रह्मांड में?


बबलू (गूगल पर टाइप करता हुआ): मम्मी, गूगल कहता है – "एलियन का हल्दी से कोई संबंध नहीं।"


लेकिन बुआ जी का गूगल कुछ और ही है , वो है किट्टी पार्टी व्हाट्स अप यूनिवर्सिटी।


पप्पू (व्यंग्य से): बुआ जी अगर फेसबुक विश्वविद्यालय में प्रोफेसर होतीं, तो उन्हें कब का नोबल प्राइज मिल गया होता।


मैसेज टोन

[नया मैसेज: "आज रात 12:00 बजे घर के दक्षिण में एक सफेद प्याज रख दें जो उतारना हो लोन पर सारा ब्याज..." – बुआ जी]


पम्मी: अब मैं सफेद प्याज कहां से लाऊं और प्याज को दक्षिण में रखूं या खुद को उत्तर में? हंसती है ।


डैडी जी: बेटा , बुआ से कहो कि ‘मोबाइल बंद करने से भी शांति मिलती है।’

मेरा फोन टॉर्च की तरह शुरू होता है और ज्ञान का विस्फोट करने वाला बम बन जाता है!

पप्पू तू तो ग्रुप का नाम “परिवार का पचड़ा” से बदलकर बुआ जी का फॉरवर्ड चैनल” कर दे ।


बुआ जी (ऑडियो मैसेज में): पप्पू! तूने ग्रुप का नाम क्यों बदला?

मैंने वो मैसेज आप सबके भले के लिए भेजा था। कल से सब हट जाओ इस ग्रुप से…

मैं ‘बुआ ब्रॉडकास्ट चैनल’ बनाती हूँ। जिसमें सिर्फ मैं होउंगी, और मेरी आवाज़! खूब सब्सक्राबर मिलेंगे मुझे , और यू ट्यूब से होगी ढ़ेर सी इनकम , तब ना आना मेरे पास ... बुआ पार्टी तो बनती है कहते हुये । समझ लो ।.

[थ्रिलर म्यूजिक...... परिवार में सन्नाटा]


बबलू: अब बुआ जी का “न्यूज़ चैनल” खुलेगा – बिग ब्रेकिंग न्यूज .... पान खाने से मंगल दोष खत्म! मरीज को अमुक मंत्र १०१ बार सुना दो हर बीमारी छू मंतर होने की गारंटी । फिर बुआ जी की म्युजिक टीम के उस मंत्र के यूट्यूब राइट्स तुम खरीद लेना पम्मी , मंत्र वाला नुस्खा बुआ जी का और मंत्र बजाये जाने पर इनकम पम्मी की । बढ़िया काम्बिनेशन होगा ।


पप्पू (संजीदगी से): नहीं! अब बहुत हो गया। मैं उन्हें ग्रुप एडमिन बना देता हूँ। जब खुद एडमिन बन जाएँगी, तब ही ग्रुप से उनका मोह टूटेगा।


ड्रम म्युजिक .....


दृश्य 3:

"बुआ जी का बोध – और नया जागरण"

स्थान: शाम 6 बजे, छत पर सभी इकट्ठे, हाथ में मोबाइल और पकौड़े

पृष्ठभूमि – स्ट्रीट लाइट जल गईं है , शीतल हवा चल रही है , पक्षियों के कलरव की आवाज़ के बीच


वॉयसओवर: "शाम आई है, रिश्तों की नई रोशनी के साथ। बुआ जी खुद छत पर तशरीफ़ ला चुकी हैं – मोबाइल हाथ में है , और चेहरा आत्मचिंतन से भरा हुआ है ।"


बुआ जी (धीरे-धीरे): पप्पू बेटा, मैंने सोचा… तुम सबने मुझे कभी टोका नहीं। हमेशा मेरा हर मैसेज पढ़ा… हार्ट वाली इमोजी बनाकर , हाथ जोड़कर रिएक्ट किया।

लेकिन कल जब मैंने 48 लोगों को रामबाण उपाय भेजा… और किसी ने जवाब नहीं दिया… तब समझ आया कि ये रिश्ता है – रिसीवर और भेजने वाले का, सिर्फ इंटरनेट का नहीं।


पम्मी (आश्चर्य से): तो बुआ जी... आप नाराज़ तो नहीं हैं ना हमसे ?


बुआ जी (मुस्कुराकर): नहीं रे बहुरिया! अब से मैं "चयन" नीति अपनाऊंगी। अब मैं दिन में सिर्फ एक संदेश भेजूँगी… वो भी सोच-समझकर। पहले खुद समझुंगी , आजमाउंगी , फारवर्ड का फैक्ट चेक करूंगी , फिर खुद लिखकर , ऐसा मैसेज लिखुंगी , जिसे पढ़कर , पढ़ने वाले को सचमुच कुछ मिले । और वह मेरे मैसेज इग्नोर करने के बजाय उनकी प्रतीक्षा किया करे । मुझे समझ आ गया है कि निश्चित ही सोशल मीडिया ज्ञान का भंडार है , क्योंकि करोड़ो लोगों के अनुभव , उनका साझा ज्ञान यहां सुलभ है । पर अधकचरे फारवर्ड से हमें खुद बचना होगा । इस तरह के मैसेज भ्रम फैलाते हैं , अफवाह बनते है । ये परपजली प्रायोजित किये जाते हैं हंसी ठठ्ठे में या सोची समझी डेटा मार्केटिग के लिये ।


बबलू: प्यारी बुआ! एक सवाल करूं ? मतलब अब अगर हम रिप्लाई न करें तो आप फिर से आप “एलियन कांड” जैसे मैसेज तो नहीं भेजेंगी न?


बुआ (हँसकर): नहीं रे! अब मैं सिर्फ खुद अपने अनुभव से बनाये अपने ही मैसेज, मन से लिखकर , ज्ञान से फॉरवर्ड करूँगी।

और हाँ, अब से बबलू को ग्रुप एडमिन नामिनेट कर रही हूं ! वो ही तय करेगा – क्या ज्ञान देना है, और क्या सेंसर करना है!


पप्पू (हँसते हुए): वाह बुआ जी! ये हुई डिजिटल डेमोक्रेसी।

आप अब सोशल मीडिया की संत विमला देवी कहलाएंगी!


[सभी मिलकर हँसते हैं – समापन संगीत]


वॉयसओवर समापन:रेडियो एंकर (मज़ाकिया लहजे में): "तो दोस्तों! ये थी हमारी झलकी – बुआ जी ऑन द ग्रुप! जहाँ सोशल मीडिया से शुरू हुआ वॉट्सऐप युद्ध, अंत में भावनाओं की विजय में बदला।

याद रहे:‘हर फॉरवर्ड जरूरी नहीं होता, पर हर रिश्ते का जवाब ज़रूरी होता है।’अब जाईये, और अपने पारिवारिक ग्रुप में बस एक मुस्कुराता हुआ इमोजी भेजिए।

क्योंकि बुआ जी देख रही हैं!"


[समापन धुन]

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